Mohan Yadav

बालाघाट: जिले के आदिवासी बहुल इलाकों में कुपोषण और बीमारी से बच्चों की मौत के मामले सामने आने के बाद अब सरकार ने बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर फोकस किया है। पांच ब्लॉक किरनापुर, बिरसा, लांजी, बैहर और परसवाड़ा में करीब 1,500 विकास कार्यों पर एक साल के दौरान लगभग 400 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। योजना में सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य केंद्र, पुलिया, स्टॉप डैम, सामुदायिक भवन और राशन दुकानों समेत कई विकास कार्य शामिल हैं।

मुख्य सचिव की निगरानी में शुरू हुआ काम

योजना को मुख्य सचिव अशोक वर्णवाल की सैद्धांतिक सहमति मिल चुकी है और काम शुरू होने की जानकारी दी गई है। शुक्रवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भी पूरे प्लान की जानकारी दी गई। योजना को जमीन पर उतारने के लिए 13 विभाग मिलकर काम करेंगे।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निर्देश पर मुख्य सचिव योजना की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। वहीं जनजातीय विभाग के प्रमुख सचिव गुलशन बामरा विभिन्न विभागों के बीच समन्वय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।

151 सड़क और सीसी रोड पर खर्च होंगे 269 करोड़

योजना में सबसे अधिक राशि पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के माध्यम से खर्च की जाएगी। पांचों ब्लॉक में 151 सड़क और सीसी रोड के निर्माण कार्य प्रस्तावित हैं। इन पर करीब 268.94 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे। इसके अलावा 69 पुलिया और कल्वर्ट के निर्माण के लिए 34.02 करोड़ रुपए तथा 60 स्टॉप डैम के लिए 35.97 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

20 से ज्यादा स्वास्थ्य केंद्र होंगे तैयार

आदिवासी इलाकों में स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए पांचों ब्लॉक में 20 से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर बनाए जाएंगे। इसके साथ ही सामुदायिक और उपस्वास्थ्य केंद्रों के भवन भी तैयार किए जाएंगे। इन स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली की व्यवस्था के लिए सोलर पैनल लगाए जाने की योजना है, ताकि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं बिजली की समस्या से प्रभावित न हों।

बच्चों की मौत वाले गांवों पर विशेष फोकस

डोंगरगांव, बोंदारी, कोंडेकसा, मछरदा, मातला और कोरका जैसे बैगा-गोंड बहुल गांवों में कुपोषण और बीमारी से बच्चों की मौत के मामले सामने आए थे। अब इन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।

पांचों ब्लॉक में पेयजल व्यवस्था मजबूत होगी

पेयजल से जुड़े कार्यों की जिम्मेदारी लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग (PHE) को दी गई है। किरनापुर और लांजी में नल-जल योजना का काम पूरा होने की जानकारी दी गई है। वहीं जिन गांवों में नल-जल योजना के निर्धारित मापदंड पूरे नहीं होते हैं, वहां वैकल्पिक माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।

सरकार की इस योजना का उद्देश्य आदिवासी बहुल क्षेत्रों में सड़क, पानी, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सुविधाओं का विस्तार कर ग्रामीणों की बुनियादी जरूरतों को बेहतर तरीके से पूरा करना है।