नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के उत्तर प्रदेश के मेरठ और वाराणसी में प्रस्तावित कार्यक्रम स्थगित होने को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग पर निशाना साधा है। कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने इस मामले को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, निर्वाचन आयोग ने स्पष्ट किया है कि दोनों कार्यक्रमों को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को ही लिया गया था और इसका मौजूदा विवाद से कोई संबंध नहीं है।
दरअसल, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का 25 सितंबर को मेरठ में निर्वाचक साक्षरता क्लब (ELC 2.0) और ECI-Net से जुड़ा क्षेत्रीय सम्मेलन प्रस्तावित था। इसके अलावा 28 सितंबर को वाराणसी में युवाओं और Gen-Z के साथ संवाद कार्यक्रम होना था। दोनों कार्यक्रम फिलहाल स्थगित कर दिए गए हैं।
पवन खेड़ा ने CEC पर साधा निशाना
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने कार्यक्रम स्थगित होने को लेकर ज्ञानेश कुमार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अब मुख्य चुनाव आयुक्त अपने कार्यक्रमों में भी नहीं जाना चाहते हैं और सवाल उठाया कि आखिर कार्यक्रम लगातार क्यों रद्द किए जा रहे हैं। पवन खेड़ा ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि आम मतदाताओं और कथित वीआईपी मतदाताओं के बीच अंतर किया जा रहा है। उन्होंने मतदाता अधिकारों और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की ओर से लगाए जा रहे आरोपों को दोहराया।
‘ज्ञानेश कुमार का गुप्त मिशन अब गुप्त नहीं रहा’
पवन खेड़ा ने कहा कि संविधान निर्माताओं ने यह सुनिश्चित किया था कि प्रत्येक नागरिक को वोट देने का समान अधिकार मिले। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग की मौजूदा कार्यप्रणाली में आम मतदाताओं के अधिकारों को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस नेता ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की ओर से मतदाता सूची और वोट के अधिकार को लेकर उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया। उन्होंने आरोप लगाया कि लोगों को उनके वोट के अधिकार से दूर रखने की कोशिश की जा रही है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री से जुड़े मामले पर भी सवाल
पवन खेड़ा ने दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता से जुड़े एक मामले में सुनवाई के निस्तारण को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि आम लोगों को जहां अपनी शिकायतों के लिए इंतजार करना पड़ता है, वहीं वीआईपी मामलों में तेजी दिखाई जाती है। उन्होंने चुनाव आयोग के BLO ऐप में कथित तौर पर नई वीआईपी वोटर श्रेणी जोड़ने का भी आरोप लगाया। हालांकि, इन आरोपों को लेकर चुनाव आयोग की ओर से अलग से कोई पुष्टि इस रिपोर्ट में सामने नहीं आई है।
कांग्रेस कर रही इस्तीफे की मांग
कांग्रेस की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की जा रही है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने दिल्ली समेत लखनऊ, पटना, हैदराबाद, गुवाहाटी और कोलकाता में चुनाव आयोग के कार्यालयों की ओर मार्च भी निकाला। दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग की थी। यह राजनीतिक विवाद ऐसे समय सामने आया है, जब चुनाव आयोग के भीतर कुछ मुद्दों को लेकर आयुक्तों के बीच मतभेद की खबरें भी सामने आई हैं। चुनाव आयोग ने हालांकि कहा है कि उसके फैसले संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं।
मेरठ और वाराणसी में क्या होना था?
मेरठ में 25 सितंबर को पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शैक्षणिक संस्थानों के विद्यार्थियों और शिक्षकों के साथ संवाद होना था। कार्यक्रम का उद्देश्य युवाओं को चुनावी प्रक्रिया, मतदाता पंजीकरण, मतदान और चुनाव आयोग की भूमिका के बारे में जानकारी देना था। वहीं, वाराणसी में 28 सितंबर को युवाओं और Gen-Z के साथ संवाद प्रस्तावित था। दोनों कार्यक्रम निर्वाचन आयोग के ELC 2.0 और मतदाता जागरूकता अभियान का हिस्सा थे।
चुनाव आयोग ने दी सफाई
कार्यक्रम स्थगित होने के बाद चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने स्पष्ट किया कि दोनों सम्मेलनों को स्थगित करने का फैसला 21 सितंबर को ही लिया गया था। आयोग के मुताबिक, कार्यक्रमों की तारीखों में बदलाव एक सामान्य प्रक्रिया है और इसके पीछे कार्यक्रम स्थल की उपलब्धता, वरिष्ठ अधिकारियों के कार्यक्रम और प्राकृतिक परिस्थितियों समेत कई कारण हो सकते हैं। आयोग ने यह भी बताया कि इससे पहले हिमाचल प्रदेश, लद्दाख और उत्तराखंड में भी ELC सम्मेलनों की तारीखों में बदलाव या उन्हें स्थगित किया गया है। आयोग ने मौजूदा राजनीतिक विवाद और इन दोनों कार्यक्रमों के स्थगन के बीच किसी संबंध से इनकार किया है।
फिलहाल मेरठ और वाराणसी के दोनों कार्यक्रमों की नई तारीख घोषित नहीं की गई है। कार्यक्रम स्थगित होने की timing को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी हैं, जबकि चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष है कि फैसला 21 सितंबर को ही लिया गया था और यह विभिन्न प्रशासनिक कारणों से संबंधित है।
