Bhopal Master Plan: भोपाल। राजधानी भोपाल के लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान को लेकर अब प्रक्रिया आगे बढ़ गई है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने मास्टर प्लान का ड्राफ्ट जारी करते हुए कहा कि इसमें शहर के विकास के साथ भोपाल के लोगों के हितों और प्राकृतिक संसाधनों का भी ध्यान रखा गया है। ड्राफ्ट पर आम लोगों और विशेषज्ञों से सुझाव लिए जाएंगे, जिसके बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट ने 22 सितंबर को राज्य सरकार को ड्राफ्ट प्रकाशित करने की अनुमति दी थी, हालांकि अंतिम मास्टर प्लान को लेकर कोर्ट की मंजूरी की शर्त बनी हुई है।
बीजेपी ने बताया जनता की जरूरतों के अनुरूप तैयार ड्राफ्ट
मध्यप्रदेश भाजपा के मीडिया प्रभारी बृजगोपाल लोया ने मास्टर प्लान को भोपाल की जनता की जरूरतों के अनुरूप तैयार विकास का खाका बताया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने समीक्षा के बाद ड्राफ्ट जारी किया है।
लोया के मुताबिक, ड्राफ्ट में भोपाल और आसपास के प्राकृतिक संसाधनों का ध्यान रखा गया है। साथ ही शहर के निवासियों और व्यवसायियों से जुड़े हितों को भी ध्यान में रखा गया है। उन्होंने कहा कि अब जनता और विशेषज्ञ अपने सुझाव देंगे और सुझाव-आपत्तियों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इसे आगे लागू करने की दिशा में कदम बढ़ाया जाएगा।
कांग्रेस ने सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
वहीं, कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी ने मास्टर प्लान को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भोपाल का विकास लंबे समय से नए मास्टर प्लान के अभाव में प्रभावित रहा है। चौधरी ने कहा कि पिछला मास्टर प्लान 1995 में आया था और उसकी अवधि 2005 में समाप्त हो गई थी। नए मास्टर प्लान में भी उन्होंने कई विसंगतियां होने का दावा किया।
कुणाल चौधरी ने उठाए जमीनों को लेकर सवाल
कुणाल चौधरी ने सरकार से मास्टर प्लान को लेकर नीति और नीयत स्पष्ट करने की मांग की। उन्होंने कहा कि जनता और व्यापारी परेशान हैं और उन्हें आशंका है कि कहीं इसका फायदा केवल भाजपा से जुड़े लोगों को न मिले। चौधरी ने यह भी सवाल उठाया कि क्या मास्टर प्लान आम जनता के हित में तैयार किया गया है या बड़े अधिकारियों और नेताओं की जमीनों को लाभ पहुंचाने के लिए इसमें प्रावधान किए गए हैं। उन्होंने सरकार से इन सवालों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
21 साल से लंबित था नया मास्टर प्लान
भोपाल का नया मास्टर प्लान करीब 21 साल से लंबित था। सुप्रीम कोर्ट की 22 सितंबर की सुनवाई के बाद ड्राफ्ट प्रकाशित करने का रास्ता साफ हुआ। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आवासीय उपयोग के लिए निर्धारित क्षेत्रों में व्यावसायिक गतिविधियों को लेकर मौजूदा मास्टर प्लान और संबंधित नियमों के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
