भोपाल: मध्यप्रदेश सरकार अपने हवाई बेड़े को आधुनिक बनाने के साथ प्रदेश में एयर कनेक्टिविटी का नेटवर्क मजबूत करने की तैयारी कर रही है। सरकार के बेड़े में आधुनिक ACH160 हेलीकॉप्टर शामिल किया जा रहा है, जबकि Bombardier Challenger 3500 बिजनेस जेट भी बेड़े में शामिल होने की प्रक्रिया में है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक जेट की कीमत करीब 230-235 करोड़ रुपए है और इसे वीआईपी यात्राओं के लिए इस्तेमाल किया जाना है।

नए विमान और हेलीकॉप्टर का प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में इस्तेमाल आसान बनाने के लिए हेलीपैड और हवाई पट्टियों के विस्तार की योजना पर भी काम किया जा रहा है।

दो साल में 63 नए हेलीपैड बनाने की योजना

प्रदेश में पहले से बड़ी संख्या में हेलीपैड मौजूद हैं। अब सरकार अगले दो वर्षों में करीब 63 नए हेलीपैड विकसित करने की योजना पर काम कर रही है। प्रस्तावित नेटवर्क को इस तरह विकसित करने की तैयारी है कि प्रमुख क्षेत्रों में करीब 50 किलोमीटर के दायरे में हेलीकॉप्टर लैंडिंग की सुविधा उपलब्ध हो सके।

इससे मुख्यमंत्री और अन्य वीआईपी के दौरों में समय की बचत हो सकती है। वर्तमान में कई बार पहले विमान से किसी एयरपोर्ट तक पहुंचना पड़ता है और इसके बाद सड़क या हेलीकॉप्टर के जरिए आगे जाना होता है। पर्याप्त हेलीपैड विकसित होने पर संबंधित क्षेत्र के नजदीक सीधे हेलीकॉप्टर से पहुंचना संभव हो सकेगा।

ACH160 हेलीकॉप्टर में आधुनिक सुविधाएं

मध्यप्रदेश सरकार ने फ्रांस की Airbus से ACH160 हेलीकॉप्टर खरीदा है। हालिया रिपोर्ट के अनुसार हेलीकॉप्टर भारत पहुंचने के बाद असेंबल किया जाएगा और इसके बाद इसे भोपाल लाया जाएगा। दो पायलटों को इसे संचालित करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया गया है ACH160 को आधुनिक तकनीक से लैस हेलीकॉप्टर के तौर पर तैयार किया गया है। इसकी कॉन्फिगरेशन के अनुसार इसमें यात्रियों और क्रू के लिए अलग-अलग क्षमता उपलब्ध हो सकती है। सरकार के लिए तैयार किए जा रहे हेलीकॉप्टर का इस्तेमाल आधिकारिक यात्राओं में किया जाएगा।

Challenger 3500 जेट पर भी तैयारी

मध्यप्रदेश सरकार ने Bombardier Challenger 3500 मिड-साइज बिजनेस जेट खरीदने का समझौता किया था। 2024 में सामने आई जानकारी के अनुसार इसकी कीमत 235 करोड़ रुपए से अधिक बताई गई थी। जेट को मुख्यमंत्री समेत अन्य वीआईपी यात्राओं के लिए इस्तेमाल किया जाना है। हालिया रिपोर्टों के मुताबिक जेट के संचालन के लिए मध्यप्रदेश के पायलटों को निर्माता कंपनी के प्रशिक्षण कार्यक्रम में भेजा गया है। जेट के राज्य में आने के बाद इसे उड़ान सेवा में लेने से पहले तकनीकी और सुरक्षा जांच की प्रक्रिया भी पूरी की जाएगी।

हर एयरफील्ड पर नहीं उतर पाएगा नया जेट

Challenger 3500 के संचालन के लिए पर्याप्त लंबाई वाले रनवे और अन्य विमानन सुविधाओं की जरूरत होगी। इसलिए सरकार के सामने चुनौती यह है कि मौजूदा हवाई पट्टियों को किस तरह अपग्रेड किया जाए, ताकि जेट का इस्तेमाल ज्यादा से ज्यादा स्थानों से किया जा सके।रनवे की लंबाई बढ़ाने के साथ एप्रोच रोड, सुरक्षा क्षेत्र और अन्य जरूरी विमानन सुविधाओं का विकास भी करना होगा। इसके लिए संबंधित जिलों में उपलब्ध जमीन और विस्तार की संभावनाओं का आकलन किया जा रहा है।

करीब 20 हवाई पट्टियों के विस्तार की तैयारी

विमानन विभाग प्रदेश की करीब 20 हवाई पट्टियों के विस्तार की संभावनाओं पर काम कर रहा है। इसके लिए संबंधित जिलों के कलेक्टरों से जमीन की उपलब्धता की जानकारी मांगी गई है। विस्तार में रनवे की लंबाई बढ़ाने के अलावा जमीन, एप्रोच रोड, सुरक्षा क्षेत्र और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर भी काम करना होगा। जमीन की उपलब्धता और परियोजना की वास्तविक लागत के आधार पर खर्च अलग-अलग हो सकता है।

एयरपोर्ट और हवाई पट्टियों के विकास पर जोर

हाल के दिनों में राज्य सरकार ने एयर कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए कई स्तरों पर काम शुरू किया है। सितंबर 2026 में कैबिनेट ने रतलाम और सिंगरौली की हवाई पट्टियों के विकास को भी मंजूरी दी है। वहीं, सागर के लिए भविष्य की जरूरत को देखते हुए नए एयरपोर्ट के लिए उपयुक्त जमीन तलाशने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार के नए हवाई बेड़े और हेलीपैड-हवाई पट्टी नेटवर्क के विस्तार से प्रदेश के दूरस्थ क्षेत्रों तक आधिकारिक और आपातकालीन हवाई पहुंच बढ़ाने की योजना को गति मिल सकती है।