मुंबई। नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों चर्चा में है। फिल्म की बॉक्स ऑफिस कमाई के साथ इसका भजन ‘संकट के कटैया हनुमान’ भी लोगों के बीच खूब लोकप्रिय हो रहा है। इस भजन को अपनी आवाज देने वाले बुंदेलखंड के लोकगायक सुनील लोधी की कहानी भी किसी प्रेरणादायक सफर से कम नहीं है।
कभी ट्रेन और गांव-देहात में तंबूरा लेकर भजन गाने वाले सुनील लोधी आज अपनी आवाज के दम पर देशभर में पहचान बना रहे हैं। जन्म से दृष्टिबाधित सुनील ने न तो किसी बड़े संगीत संस्थान से प्रशिक्षण लिया और न ही उन्हें कोई फिल्मी गॉडफादर मिला। इसके बावजूद उनकी प्रतिभा ने उन्हें बड़े पर्दे तक पहुंचा दिया।
10 साल की उम्र में सीखा तंबूरा बजाना
सुनील लोधी का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर था। जन्म से दृष्टिबाधित होने के कारण वह स्कूल भी नहीं जा सके। संगीत की कोई औपचारिक ट्रेनिंग भी उन्हें नहीं मिली। इसके बावजूद उन्होंने करीब 10 साल की उम्र में तंबूरा बजाना सीख लिया और इसी के सहारे भजन गाने का सफर शुरू किया। समय के साथ सुनील ट्रेन में भजन गाने लगे। इसके अलावा वह गांव-गांव घूमकर तंबूरा बजाते और भजन सुनाते थे। यही उनकी रोजी-रोटी का जरिया भी बना।
‘संकट के कटैया हनुमान’ ने दिलाई नई पहचान
फिल्म ‘हनुमान अंश’ में सुनील लोधी की आवाज में गाया गया भजन ‘मोरे संकट के कटैया हनुमान’ सोशल मीडिया पर तेजी से लोकप्रिय हुआ। भजन वायरल होने के बाद लोगों ने इसके गायक के बारे में जानना शुरू किया और सुनील लोधी का नाम सामने आया। दिए गए विवरण के मुताबिक, भजन को यूट्यूब पर 30 करोड़ से अधिक व्यूज मिल चुके हैं और इंस्टाग्राम पर भी इसके ऑडियो पर बड़ी संख्या में रील बनाई जा रही हैं। सुनील की आवाज अब सोशल मीडिया से निकलकर बॉलीवुड तक अपनी पहचान बना रही है।
सोशल मीडिया ने पहुंचाया फिल्म के निर्देशक तक
सुनील लोधी की आवाज सोशल मीडिया के जरिए फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी तक पहुंची। उनकी आवाज से प्रभावित होकर निर्देशक ने उन्हें फिल्म में भजन गाने का मौका दिया। इसके बाद ‘संकट के कटैया हनुमान’ ने सुनील को नई पहचान दिला दी।
न स्कूल, न ट्रेनिंग, न गॉडफादर… हुनर ने बनाई पहचान
सुनील लोधी की कहानी इस मायने में खास है कि उनके पास न संगीत की औपचारिक शिक्षा थी, न बड़े मंच का अनुभव और न ही फिल्म इंडस्ट्री में कोई पहचान। उनके पास था तो सिर्फ एक तंबूरा, हनुमान जी के प्रति अटूट आस्था, अपनी आवाज और आगे बढ़ने का हौसला। कभी ट्रेन और गांवों में भजन गाकर जीवन चलाने वाले सुनील लोधी आज अपनी आवाज के जरिए लाखों-करोड़ों लोगों तक पहुंच रहे हैं। ‘हनुमान अंश’ के भजन ने उनके संघर्ष और हुनर को एक ऐसा मंच दिया है, जिसकी शायद उन्होंने भी कभी कल्पना नहीं की होगी।
