सिंगरौली: मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले की चितरंगी तहसील के ग्राम झोंखो में ललितपुर-सिंगरौली रेलवे लाइन निर्माण के लिए किए गए भूमि अधिग्रहण और मुआवजे को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश सामने आया है। प्रभावित ग्रामीणों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग-39 के किनारे रेलवे मार्ग पर अनिश्चितकालीन शांतिपूर्ण धरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेता अशोक सिंह पैगाम की अध्यक्षता में शुरू हुए इस आंदोलन में प्रभावित परिवारों के साथ बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं।

311 मकानों का सर्वे, अवार्ड में सिर्फ 26 शामिल

आंदोलन कर रहे ग्रामीणों का आरोप है कि पूर्व में प्रशासन की ओर से किए गए संयुक्त सर्वे में करीब 311 मकानों और अन्य परिसंपत्तियों का भौतिक मूल्यांकन किया गया था। हालांकि, मुआवजा वितरण के लिए जब अवार्ड पारित किया गया तो उसमें केवल 26 मकानों को ही शामिल किया गया।

ग्रामीणों के मुताबिक बाकी 285 मकानों और परिसंपत्तियों का मामला अब भी लंबित है। उनका कहना है कि इस संबंध में कई बार प्रशासनिक अधिकारियों को आवेदन और ज्ञापन दिए गए, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। इसके बाद प्रभावित परिवारों ने आंदोलन का रास्ता अपनाया है।

285 लंबित मकानों का अवार्ड पारित करने की मांग

धरना स्थल पर ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने कई मांगें रखी हैं। उनकी प्रमुख मांग है कि लंबित 285 मकानों का तत्काल अवार्ड पारित कर प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए। इसके साथ ही वास्तविक रेलवे एलाइनमेंट के आधार पर जमीन का सीमांकन कर अतिरिक्त अधिग्रहित रकबे का नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की गई है।

बैगा परिवारों के पुनर्मूल्यांकन और विस्थापन की मांग

ग्रामीणों ने प्रभावित और छूटे हुए गरीब बैगा समाज के परिवारों के मकानों का दोबारा मूल्यांकन करने की मांग भी उठाई है। इसके अलावा प्रभावित परिवारों को उचित स्थान पर विस्थापित करने और पात्र परिवार के सदस्यों को रेलवे में रोजगार देने की मांग की जा रही है।

मौके पर पहुंचे अधिकारी, समाधान की मांग

आंदोलनकारी ग्रामीणों का कहना है कि जिला प्रशासन के अधिकारियों को धरना स्थल पर पहुंचकर पूरे मामले की जानकारी लेनी चाहिए। ग्रामीण चाहते हैं कि मुआवजा वितरण, जमीन के सीमांकन, लंबित अवार्ड और विस्थापन से जुड़े मामलों का मौके पर ही समाधान किया जाए।

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि जब तक उनकी मांगों का लिखित और ठोस समाधान नहीं किया जाता, तब तक उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। साथ ही उन्होंने संकेत दिया है कि यदि प्रशासन ने जल्द पहल नहीं की तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।