भोपाल: मध्यप्रदेश में आयुष्मान भारत योजना के तहत मरीजों का इलाज करने वाले निजी अस्पतालों को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने सख्त कदम उठाया है। भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के करीब 90 बड़े निजी अस्पतालों से वैध NABH (नेशनल एक्रीडिटेशन बोर्ड फॉर हॉस्पिटल्स) एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने को कहा गया है। विभाग ने इसके लिए अस्पतालों को अंतिम 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है।
स्वास्थ्य विभाग के निर्देश के मुताबिक जिन अस्पतालों के पास वैध NABH एंट्री-लेवल सर्टिफिकेट उपलब्ध नहीं है, वहां आयुष्मान योजना के तहत नए मरीजों को भर्ती कर इलाज देने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी गई है। विभाग का यह आदेश लागू होने के बाद संबंधित अस्पतालों के सामने अब निर्धारित समय में जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत करने की चुनौती है।
1 अक्टूबर से लागू हुई थी अनिवार्यता
सरकार की ओर से आयुष्मान योजना से संबद्ध अस्पतालों के लिए NABH सर्टिफिकेट की अनिवार्यता 1 अक्टूबर से लागू की गई थी। इसका उद्देश्य आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को मिलने वाली स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और अस्पतालों में निर्धारित मानकों के पालन को सुनिश्चित करना बताया गया है। इस नीति के लागू होने के बाद चार प्रमुख महानगरों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से की गई यह कार्रवाई अब तक की बड़ी प्रशासनिक कार्रवाई मानी जा रही है।
पहले चरण में चार बड़े शहरों पर फोकस
स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई के पहले चरण में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के अस्पतालों को शामिल किया गया है। इन शहरों में आयुष्मान योजना के तहत इलाज करने वाले करीब 90 बड़े निजी अस्पतालों से NABH प्रमाणपत्र मांगा गया है। अस्पतालों को लंबित औपचारिकताएं पूरी करने और निर्धारित मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
दूसरे चरण में अन्य जिलों के अस्पताल भी आएंगे दायरे में
विभाग की योजना के मुताबिक आने वाले समय में प्रदेश के अन्य जिलों में आयुष्मान योजना से जुड़े अस्पतालों पर भी यही नियम लागू किया जाएगा। अब किसी नए जनरल अस्पताल को बिना NABH सर्टिफिकेट के आयुष्मान योजना में मान्यता यानी Empanelment नहीं दिया जाएगा। इससे आयुष्मान योजना से जुड़ने वाले नए अस्पतालों के लिए भी गुणवत्ता संबंधी मानकों को पूरा करना जरूरी हो जाएगा।
आदिवासी क्षेत्रों के अस्पतालों को फिलहाल राहत
स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के जनजातीय बहुल क्षेत्रों में स्थित अस्पतालों को फिलहाल इस नियम से अस्थायी राहत दी है। इसके पीछे इन क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों और मरीजों को उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं को प्रभावित होने से बचाने की वजह बताई गई है। इन इलाकों में नियम लागू करने से पहले मरीजों की स्वास्थ्य सुविधाओं और अस्पतालों की उपलब्धता को ध्यान में रखा जाएगा।
निजी अस्पताल संचालकों में बढ़ी हलचल
स्वास्थ्य विभाग की इस कार्रवाई के बाद भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर के निजी अस्पताल संचालकों में हलचल बढ़ गई है। अब अस्पतालों को निर्धारित समय में NABH से जुड़े दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। विभाग की सख्ती से साफ संकेत है कि आयुष्मान योजना के तहत मरीजों को इलाज देने वाले अस्पतालों के लिए गुणवत्ता और मानकों का पालन अनिवार्य किया जा रहा है।
