नागपुर: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर के धंतोली स्थित दुर्गा पंडाल में पूजा-अर्चना की। इस दौरान उन्होंने शक्ति की उपासना का महत्व बताते हुए कहा कि शिव से शक्ति का ‘इ’कार निकाल दिया जाए, तो केवल शव बचता है। उन्होंने कहा कि शक्ति है, तभी सब कुछ संभव है। मां की उपासना के साथ व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद सद्गुणों को जागृत करना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने लोगों को विजयदशमी की शुभकामनाएं भी दीं।
मोहन भागवत ने कहा कि देवी की उपासना के दौरान ‘या देवी सर्वभूतेषु’ मंत्र का पाठ किया जाता है। इसके माध्यम से मां के विभिन्न गुणों का स्मरण किया जाता है। उन्होंने कहा कि मां करोड़ों लोगों के हृदय में सद्गुणों और संपदा के साथ विराजमान हैं। जरूरत इन गुणों को जागृत करने की है।
व्यक्ति, परिवार और राष्ट्र के लिए उपासना महत्वपूर्ण
संघ प्रमुख ने भगवद्गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि कीर्ति, श्री और श्रद्धा जैसे सद्गुण हमारे भीतर मौजूद हैं। इन्हें जागृत और सक्रिय करना ही हमारी शक्ति बनता है। मां के सगुण स्वरूप की उपासना का उद्देश्य भी इन्हीं गुणों को जागृत करना है। उन्होंने कहा कि यह उपासना व्यक्ति, परिवार और राष्ट्र, तीनों के लिए कल्याणकारी है।
राष्ट्र के नवउत्थान में मां की शक्ति का महत्व
मोहन भागवत ने कहा कि भारत के नवउत्थान के शुरुआती दौर में रामकृष्ण परमहंस ने मां की उपासना की थी और उनके आशीर्वाद से स्वामी विवेकानंद आगे बढ़े। उन्होंने कहा कि आज देश के सार्वजनिक जीवन और कार्यों में विवेकानंद की छाया दिखाई देती है। मां की शक्ति को राष्ट्र की शक्ति से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि उपासना मनोभाव से करनी चाहिए। अपने भीतर मौजूद सद्गुणों को जागृत करके व्यक्ति और राष्ट्र, दोनों की शक्ति को सक्रिय किया जा सकता है।
भारतीय परंपराओं के महत्व पर भी दिया था जोर
बता दें कि मोहन भागवत इससे पहले भी भारतीय परंपराओं और संस्कृति के महत्व पर अपनी बात रख चुके हैं। हाल ही में नागपुर जिले के देओलापुर स्थित गौ-विज्ञान अनुसंधान केंद्र में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा था कि भारत की परंपराएं समाज और दुनिया की सुरक्षा तथा कल्याण के लिए महत्वपूर्ण हैं। यह कार्यक्रम विश्व हिंदू परिषद के दिवंगत अध्यक्ष अशोक सिंघल की जन्म शताब्दी के अवसर पर आयोजित किया गया था।
