नई दिल्ली: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने गुरुवार, 24 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित किया। उनके भाषण की शुरुआत होते ही दर्जनों देशों के प्रतिनिधि विरोध में हॉल से बाहर निकल गए। इस दौरान सदन में कई सीटें खाली हो गईं। इसके बावजूद नेतन्याहू ने अपना भाषण जारी रखा और गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई, ईरान के खिलाफ अभियान और यहूदियों के खिलाफ बढ़ते विरोध समेत कई मुद्दों पर इजरायल का पक्ष रखा।
भाषण शुरू होते ही प्रतिनिधियों ने किया वॉकआउट
नेतन्याहू जैसे ही संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर पहुंचे, कई देशों के प्रतिनिधि अपनी सीटों से उठकर बाहर निकलने लगे। Reuters के अनुसार, यह वॉकआउट गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई और उसकी नीतियों के विरोध में हुआ। हॉल में कुछ प्रतिनिधि मौजूद रहे और नेतन्याहू ने खाली होती सीटों के बीच अपना संबोधन जारी रखा। नेतन्याहू ने वॉकआउट करने वाले प्रतिनिधियों को निशाने पर लेते हुए उन्हें ‘मोरल कायर’ कहा और तंज कसते हुए कहा कि अगर कोई अन्य नैतिक कायर अभी हॉल में बचा है तो वह भी बाहर चला जाए।
गाजा में नरसंहार के आरोपों को नेतन्याहू ने खारिज किया
अपने भाषण में नेतन्याहू ने गाजा में इजरायल के खिलाफ लगाए जा रहे नरसंहार के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने इन आरोपों को उनके शब्दों में ‘सदी का सबसे बड़ा झूठ’ बताया। नेतन्याहू ने इजरायल की सैन्य कार्रवाई का बचाव करते हुए हमास पर नागरिकों को ढाल के तौर पर इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। ये उनके द्वारा प्रस्तुत दावे हैं; गाजा में इजरायल की कार्रवाई को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीर आरोप और जांचें जारी हैं।
ईरान पर सैन्य कार्रवाई को बताया आसान फैसला
नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ इजरायल की सैन्य कार्रवाई का भी बचाव किया। उन्होंने कहा कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला करना प्रधानमंत्री के तौर पर लिए गए सबसे आसान फैसलों में से एक था। उन्होंने दावा किया कि अगर इजरायल ने कार्रवाई नहीं की होती तो उसके लिए गंभीर खतरा पैदा हो सकता था। नेतन्याहू ने यह भी कहा कि इजरायल की कार्रवाई से दूसरे देशों की सुरक्षा में भी मदद हुई है। हालांकि, ये दावे नेतन्याहू के भाषण में रखे गए इजरायल के पक्ष के तर्क हैं।
दुनिया भर के यहूदियों को दिया संदेश
नेतन्याहू ने अपने संबोधन में दुनिया भर में यहूदी समुदाय के खिलाफ बढ़ते विरोध और यहूदी-विरोधी भावना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि यहूदियों को डरने के बजाय आत्मविश्वास के साथ खड़ा होना चाहिए और अपनी सुरक्षा के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने इजरायल को यहूदियों की सुरक्षा के लिए एक मजबूत देश के रूप में पेश करते हुए दुनिया भर के यहूदियों से गर्व और आत्मविश्वास के साथ खड़े रहने का आह्वान किया।
UN के बाहर भी हुआ विरोध प्रदर्शन
नेतन्याहू के भाषण से पहले और उनके संबोधन के दौरान संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के बाहर भी विरोध प्रदर्शन हुए। Reuters के अनुसार, न्यूयॉर्क पुलिस ने विरोध प्रदर्शनों के दौरान कम से कम 30 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें अभिनेता और राजनेता भी शामिल थे।
इस तरह नेतन्याहू का संयुक्त राष्ट्र संबोधन गाजा युद्ध, ईरान के साथ संघर्ष और इजरायल की नीतियों को लेकर अंतरराष्ट्रीय मतभेदों के बीच हुआ, जिसमें एक ओर उनके भाषण के दौरान बड़े पैमाने पर वॉकआउट देखने को मिला, वहीं दूसरी ओर उन्होंने मंच से इजरायल के सैन्य कदमों का जोरदार बचाव किया।
