भोपाल: बड़े आंदोलनों के दौरान प्रदर्शनकारियों को शहर की सीमा से पहले रोकने की प्रस्तावित व्यवस्था को लेकर मध्यप्रदेश में सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव कुणाल चौधरी ने इस मुद्दे पर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विधानसभा चुनाव में अभी करीब दो साल का समय है, लेकिन सरकार की तैयारियां ऐसी दिखाई दे रही हैं जैसे जनता जल्द ही वोट देने वाली हो। उन्होंने सवाल किया कि सरकार जनता की समस्याओं का समाधान करने की तैयारी कर रही है या जनता से बचने की।
दरअसल, जुलाई 2026 में भोपाल में किसानों का बड़ा आंदोलन हुआ था। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में किसान राजधानी पहुंचे और कई इलाकों में यातायात प्रभावित हुआ। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसी के बाद बड़े प्रदर्शनों के दौरान भीड़ को शहर में प्रवेश करने से पहले नियंत्रित करने की रणनीति पर पुलिस स्तर पर मंथन शुरू हुआ। जुलाई के आंदोलन के दौरान भोपाल की सीमा पर बैरिकेडिंग के बावजूद प्रदर्शनकारी राजधानी में पहुंच गए थे।
शहर के एंट्री-पॉइंट पर बैरिकेडिंग और कंटेनमेंट जोन का प्रस्ताव
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत भोपाल के प्रमुख एंट्री-एग्जिट पॉइंट पर अस्थायी बैरिकेडिंग और कंटेनमेंट जोन बनाए जाने पर विचार किया जा रहा है। बड़े वाहनों और प्रदर्शनकारियों को शहर में प्रवेश से पहले नियंत्रित करने तथा जरूरत पड़ने पर उन्हें प्रशासन द्वारा तय वैकल्पिक प्रदर्शन स्थल की ओर भेजने की व्यवस्था प्रस्तावित है। निगरानी के लिए ड्रोन और सीसीटीवी के इस्तेमाल की बात भी सामने आई है।
भोपाल पुलिस पहले से ही धरना-प्रदर्शन और आंदोलनों के दौरान कानून-व्यवस्था तथा यातायात को बनाए रखने के लिए अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े प्रावधान लागू करती है।
कुणाल चौधरी ने पूछा- किसान दाम मांगेगा तो क्या बैरिकेड लगाए जाएंगे?
कांग्रेस नेता कुणाल चौधरी ने प्रस्तावित व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर किसान अपनी फसल का उचित दाम मांगता है तो क्या उसके लिए बैरिकेड लगाए जाएंगे? युवा रोजगार की मांग करेंगे तो क्या उनके रास्ते बंद किए जाएंगे? महंगाई और कर्ज जैसे मुद्दों पर सवाल उठेंगे तो क्या शहर के एंट्री-पॉइंट बंद कर दिए जाएंगे?
उन्होंने कहा कि किसान आंदोलन से यदि सरकार ने यह निष्कर्ष निकाला है कि जनता की आवाज को बैरिकेड लगाकर रोका जाए, तो यह लोकतांत्रिक संवाद के लिए उचित नहीं है। चौधरी ने कहा कि बैरिकेड सड़क को रोक सकते हैं, लेकिन जनता की आवाज को नहीं।
‘सरकार को जनता से डरने के बजाय उसकी बात सुननी चाहिए’
कुणाल चौधरी ने कहा कि जिस सरकार को चुनाव से करीब दो साल पहले ही जनता के विरोध की चिंता सताने लगे, उसे यह आत्ममंथन करना चाहिए कि आखिर जनता नाराज क्यों है। उन्होंने सरकार से जनता की समस्याओं को सुनने और उनके समाधान की दिशा में काम करने की बात कही। कांग्रेस नेता ने कहा कि उनकी पार्टी आगे भी जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाती रहेगी और सरकार से जवाब मांगती रहेगी। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब भोपाल में बड़े आंदोलनों के दौरान कानून-व्यवस्था और यातायात प्रबंधन को लेकर नई व्यवस्थाओं पर चर्चा चल रही है।
