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राजा हिरदेशाह पर पढ़ाई और शोध को बढ़ावा, हीरापुर बनेगा तीर्थ: CM मोहन यादव

भोपाल। स्वतंत्रता संग्राम के नायक रहे राजा हिरदेशाह का व्यक्तित्व और कृतित्व पुस्तकों में पढ़ाया जाएग। उनके संघर्ष पर शोध होगा। इसके साथ ही उनके जन्मस्थल हीरापुर (नरसिंहपुर जिला) को तीर्थ के रूप में विकसित किया जाएगा।

यह घोषणा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भोपाल के जंबूरी मैदान में राजा हिरदेशाह के 168वें बलिदान दिवस पर लोधी समाज द्वारा आयोजित शौर्य यात्रा में कही। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम अपने क्रांतिकारी को स्मरण नहीं करेंगे तो यह जीवन धिक्कार है।

इतिहास के यह सारे पृष्ठ पुन: सबके सामने आना चाहिए
राजा हिरदेशाह ने बुंदेला-गोंड समाज को एकजुट कर अपनी अलग पहचान बनाई और अंग्रेजों को कड़ी चुनौती दी। इतिहासकारों को इस विषय पर पुनर्विचार करने की जरूरत है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास के यह सारे पृष्ठ पुन: खुलकर सबके सामने आना चाहिए।

प्रदेश सरकार के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग तथा श्रम मंत्री प्रहलाद पटेल ने नर्मदा टाइगर के नाम से विख्यात प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (बुंदेलखंड विद्रोह-1842) के महानायक राजा हिरदेशाह जूदेव लोधी के बलिदान दिवस (28 अप्रैल) पर कृतज्ञतापूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की है।

अंग्रेजों के विरुद्ध 1842 में बुंदेला विद्रोह का सफल नेतृत्व किया
कैबिनेट मंत्री ने कहा कि राजा हिरदेशाह लोधी ने नरसिंहपुर जिले की हीरागढ़ रियासत से संपूर्ण सागर व नर्मदा टेरिटरीज के तहत सभी बुंदेला, गौंड़, राजगौंड़ व लोधी राजाओं को संगठित कर अंग्रेजों के विरुद्ध 1842 में बुंदेला विद्रोह का सफल नेतृत्व किया।

नरसिंहपुर को फिर से जिला बनाने के लिए अंग्रेजोंं को मजबूर होना पड़ा
सागर जिले के शाहगढ़ के राजा बखतबली ने धोखे से राजा हिरदेशाह को उनके परिवार सहित 22 दिसम्बर 1842 को गिरफ्तार करवा दिया। भीषण संघर्ष के बाद ब्रिटिश सरकार को समझौता करना पड़ा और नरसिंहपुर जिले के लगान में 10 प्रतिशत की छूट देनी पड़ी। इसके बाद 1843 में नरसिंहपुर को फिर से जिला बनाने के लिए अंग्रेजी हुकूमत को मजबूर होना पड़ा।

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