Dhanteras 2026: धनतेरस का त्योहार सुख-समृद्धि और वैभव का प्रतीक माना जाता है। साल 2026 में धनतेरस का पर्व 6 नवंबर को मनाया जाएगा। इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर देव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि धनतेरस पर विधि-विधान से लक्ष्मी-कुबेर की पूजा करने से घर में सुख-समृद्धि और बरकत बनी रहती है। पूजा के साथ ही इस दिन माता लक्ष्मी और कुबेर देव के मंत्रों का जाप करना भी शुभ माना जाता है। आइए जानते हैं धनतेरस पर जाप किए जाने वाले माता लक्ष्मी और कुबेर देव के विशेष मंत्रों के बारे में।

माता लक्ष्मी के मंत्र

धनतेरस के शुभ अवसर पर माता लक्ष्मी के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इन मंत्रों का जाप प्रदोष काल यानी सूर्यास्त के बाद करने से विशेष फल प्राप्त होते हैं।

  • महालक्ष्मी बीजाक्षर मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद।।
  • आर्थिक उन्नति के लिए मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मीभ्यो नमः।।
  • लक्ष्मी बीज मंत्र: ॐ श्रीं महालक्ष्म्यै नमः।।
  • कर्ज मुक्ति के लिए मंत्र: ॐ ह्रीं श्री क्रीं क्लीं श्री लक्ष्मी मम गृहे धन पूरये, धन पूरये, चिंताएं दूरये-दूरये स्वाहा।।
  • सर्वबाधा मुक्ति के लिए मंत्र: ॐ ह्रीं ह्रीं श्री लक्ष्मी वासुदेवाय नमः।।

कुबेर देव के विशेष मंत्र

धनतेरस पर कुबेर देव की पूजा और मंत्र जाप का भी विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कुबेर देव के मंत्रों का जाप करने से संचित धन में वृद्धि और आर्थिक समस्याओं से मुक्ति की कामना की जाती है।

  • कुबेर अष्ट लक्ष्मी मंत्र: ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी-मम गृहे धनं पूरय पूरय नमः।।
  • कुबेर गायत्री मंत्र: ॐ यक्षराजाय विद्महे वैश्रवणाय धीमहि तन्नो कुबेरः प्रचोदयात्।।
  • कुबेर धन प्राप्ति मंत्र: ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।।
  • कुबेर देव का मूल मंत्र: ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये धनधान्यसमृद्धिं मे देहि दापय स्वाहा।।

धनतेरस पर इस तरह करें मंत्रों का जाप

धनतेरस के दिन माता लक्ष्मी और कुबेर देव की पूजा करने के बाद पूजा स्थल या किसी एकांत स्थान पर बैठकर श्रद्धापूर्वक उनके मंत्रों का जाप करें। धार्मिक मान्यता के अनुसार, विधि-विधान और श्रद्धा के साथ मंत्रों का जाप करने से जीवन में आर्थिक उन्नति, सुख-समृद्धि और मानसिक शांति की कामना की जाती है।