भोपाल: मध्यप्रदेश से केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी निर्विरोध राज्यसभा सांसद निर्वाचित हो गए हैं। उनके निर्वाचन के साथ ही प्रदेश में राज्यसभा का संख्या समीकरण बदल गया है। अब मध्यप्रदेश की 11 राज्यसभा सीटों में से 10 पर भाजपा और एक सीट पर कांग्रेस का सदस्य है। इससे पहले भाजपा के 9 और कांग्रेस के 2 सदस्य थे। वहीं, कांग्रेस ने पुरी के नामांकन में कथित अनियमितताओं को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं, जिन्हें रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कर दिया।
हरदीप सिंह पुरी के नामांकन दस्तावेजों और शपथपत्र में 100 से अधिक कमियां होने का दावा करते हुए कांग्रेस ने आपत्ति दर्ज कराई थी। कांग्रेस विधायक हेमंत कटारे और निर्दलीय प्रत्याशियों ने मुख्य रूप से तीन मुद्दों पर सवाल उठाए थे। इनमें शपथपत्र में पत्नी के नाम का उल्लेख नहीं होना, विदेशी संपत्तियों का विवरण अमेरिकी डॉलर और स्विस फ्रैंक में देना तथा जेनेवा स्थित संपत्ति और विदेशी बैंक खातों की जानकारी शामिल थी। इसके अलावा नोटरी सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए गए थे।
रिटर्निंग ऑफिसर ने खारिज कीं सभी आपत्तियां
कांग्रेस की आपत्तियों पर रिटर्निंग ऑफिसर उमेश कुमार शर्मा ने हरदीप सिंह पुरी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया। दस्तावेजों की जांच के बाद निर्वाचन अधिकारी ने सभी आपत्तियों को खारिज कर दिया। उनके मुताबिक, जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं पाया गया।
हेमंत कटारे बोले- हाईकोर्ट में दायर करेंगे चुनाव याचिका
पुरी के निर्वाचित घोषित होने के बाद उप नेता प्रतिपक्ष हेमंत कटारे ने कहा कि कांग्रेस अब इस मामले में हाईकोर्ट का रुख करेगी। उन्होंने कहा कि चुनाव प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही इलेक्शन पिटीशन यानी चुनाव याचिका दायर की जा सकती है। हमारी लीगल टीम अब हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर करेगी।
मुरुगन के इस्तीफे से खाली हुई थी राज्यसभा सीट
दरअसल, राज्यसभा की यह सीट केंद्रीय मंत्री एल. मुरुगन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी। उन्होंने 14 अक्टूबर को राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दिया था। इसके बाद निर्वाचन आयोग ने इस सीट पर उपचुनाव की प्रक्रिया शुरू की थी।
31 अक्टूबर को दाखिल किया था नामांकन
भाजपा ने 28 अक्टूबर को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी को राज्यसभा उपचुनाव के लिए अपना प्रत्याशी घोषित किया था। इसके बाद पुरी ने 31 अक्टूबर को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और अन्य पार्टी नेताओं की मौजूदगी में विधानसभा पहुंचकर अपना नामांकन दाखिल किया था। अब उनके निर्विरोध निर्वाचन के साथ ही मध्यप्रदेश की राज्यसभा में भाजपा की सदस्य संख्या बढ़कर 10 हो गई है, जबकि कांग्रेस के पास एक सीट रह गई है।
