उज्जैन: मध्य प्रदेश में धार्मिक स्थलों के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए प्रस्तावित टेंपल बॉन्ड को लेकर राजनीति गरमा गई है। उज्जैन विकास प्राधिकरण (UDA) की इस योजना के विरोध में कांग्रेस ने उज्जैन के टावर चौराहे पर अनोखा प्रदर्शन किया। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भीख मांगकर चंदा इकट्ठा किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रस्ताव का विरोध किया। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि टेंपल बॉन्ड के नाम पर मंदिरों को गिरवी रखकर बेचने की तैयारी की जा रही है।

11 प्रमुख मंदिरों के विकास के लिए टेंपल बॉन्ड की योजना

जानकारी के अनुसार, उज्जैन के काल भैरव और भूखी माता समेत 10 प्रमुख मंदिरों के साथ आगर जिले के नलखेड़ा स्थित प्रसिद्ध बगलामुखी माता मंदिर के विकास और सौंदर्यीकरण के लिए टेंपल बॉन्ड जारी करने की योजना है। इस प्रस्ताव के तहत बॉन्ड को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कर देश-विदेश से निवेश जुटाने की योजना बनाई जा रही है, ताकि धार्मिक स्थलों पर आधुनिक सुविधाओं का विस्तार किया जा सके।

टावर चौराहे पर भीख मांगकर कांग्रेस ने जताया विरोध

टेंपल बॉन्ड के प्रस्ताव के विरोध में कांग्रेस ने उज्जैन के प्रमुख टावर चौराहे पर प्रदर्शन किया। इस दौरान पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने भिक्षावृत्ति कर चंदा इकट्ठा किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। कांग्रेस ने इस योजना पर सवाल उठाते हुए इसे धार्मिक स्थलों के हितों के खिलाफ बताया।

कांग्रेस का आरोप- बॉन्ड के नाम पर मंदिरों को बेचने की तैयारी

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार मंदिरों के चंदे और सोने-चांदी में चोरी कर रही है और अब टेंपल बॉन्ड के नाम पर 11 मंदिरों को गिरवी रखकर बेचने की तैयारी की जा रही है। पार्टी ने इस प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है। हालांकि, मंदिरों को गिरवी रखने या बेचने का आरोप कांग्रेस की ओर से लगाया गया है।

प्रस्ताव वापस नहीं लेने पर प्रदेशव्यापी आंदोलन की चेतावनी

कांग्रेस ने प्रदर्शन के दौरान सरकार और प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि टेंपल बॉन्ड का प्रस्ताव तुरंत वापस नहीं लिया गया, तो पूरे मध्य प्रदेश में बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा। पार्टी ने कहा कि धार्मिक स्थलों के विकास के नाम पर लाई जा रही इस योजना का विरोध जारी रहेगा।

टेंपल बॉन्ड पर फैसले को लेकर बढ़ी राजनीतिक हलचल

टेंपल बॉन्ड को लेकर उज्जैन में शुरू हुआ विरोध अब राजनीतिक बहस का मुद्दा बन गया है। एक ओर इस योजना के जरिए धार्मिक स्थलों के विकास के लिए निवेश जुटाने का प्रस्ताव है, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस इसके स्वरूप पर सवाल उठा रही है। अब इस मामले में उज्जैन विकास प्राधिकरण और राज्य सरकार की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी।