भोपाल: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल में EOW के चर्चित भूमि घोटाला मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। अदालत ने आरोपियों के खिलाफ जेल वारंट जारी करने का आदेश दिया है। अब इस प्रकरण में आरोप तय करने के संबंध में बहस के लिए 5 नवंबर 2026 की तारीख निर्धारित की गई है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि मामले में विधि विरुद्ध तरीके से भूमि के क्रय-विक्रय का गंभीर अभियोग है और विवेचना अभी शेष है। ऐसे में आरोपियों की जमानत अर्जी स्वीकार करने योग्य नहीं है।

शिकायत के बाद EOW ने दर्ज किए थे दो मामले

यह मामला शिकायतकर्ता सुरेश कुमार जेसवानी की शिकायत से जुड़ा है। उनकी शिकायत पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW), भोपाल ने अपराध क्रमांक 47/19 और 183/19 दर्ज किए थे। मामले की जांच के बाद EOW ने चालान क्रमांक 16/26 अदालत में पेश किया। चालान के अनुसार, इस मामले में रामनाथ शर्मा, मैसर्स हरेकृष्ण कॉलोनाइजर, अश्वनी नाथ शर्मा और श्यामनाथ शर्मा, अध्यक्ष न्यू कृषि नगर गृह निर्माण सहकारी संस्था, पर शासन को धोखा देने के आरोप हैं। अदालत में प्रस्तुत मामले में भूमि के क्रय-विक्रय और निर्माण से संबंधित अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई की जा रही है।

कम रकबे का डायवर्सन दिखाकर अधिक निर्माण करने का आरोप

जांच में सामने आए आरोपों के अनुसार, ग्राम चूना भट्टी, कोलार रोड स्थित वार्ड क्रमांक 49 की खसरा नंबर 9/4, 9/5 और 103/11 की सहकारी समिति की जमीन पर कम रकबे का डायवर्सन दिखाकर अधिक निर्माण किया गया। आरोप है कि इस प्रक्रिया में भूमि के वास्तविक उपयोग और निर्माण से संबंधित नियमों का पालन नहीं किया गया। मामले में भूमि के रकबे और निर्माण से जुड़े दस्तावेजों की जांच के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है।

शासन के कब्जे की जमीन भी बेचने का आरोप

प्रकरण में आरोप है कि मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता के नियम 177 के तहत शासन के कब्जे वाली भूमि को भी पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से अलग-अलग टुकड़ों में बेचा गया। इस कथित प्रक्रिया के कारण शासन को पंजीयन और मुद्रांक शुल्क के रूप में भारी आर्थिक क्षति होने की बात सामने आई है। इन्हीं आरोपों के आधार पर भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 120-बी के तहत मामला दर्ज किया गया है। अदालत ने दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 173(8) के तहत शेष आरोपियों के संबंध में जांच जारी रखने की अनुमति भी दी है।

जमानत पर दोनों पक्षों ने रखे अपने तर्क

जमानत आवेदन पर सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष के अधिवक्ता रजनीश बरैया ने सुप्रीम कोर्ट के अरनेश कुमार और सतेन्द्र अंतिल मामलों में दिए गए फैसलों का हवाला दिया। वहीं, फरियादी पक्ष की ओर से अधिवक्ता अजीत जैन ने मामले में शीघ्र सुनवाई के लिए आवेदन प्रस्तुत किया। दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी और जेल वारंट जारी करने का आदेश दिया।

5 नवंबर को आरोप तय करने के संबंध में होगी बहस

अदालत के आदेश के अनुसार, प्रकरण को 5 नवंबर 2026 को आरोप तय करने के संबंध में बहस के लिए पेश किया जाएगा। इस तारीख पर आगे की न्यायिक प्रक्रिया को लेकर सुनवाई होगी। वहीं, जेल वारंट जारी होने के बाद तीनों आरोपियों के जेपी अस्पताल में भर्ती होने की सूचना भी सामने आई है। इस घटनाक्रम को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।

हालांकि, अस्पताल में भर्ती होने की परिस्थितियों और संबंधित चिकित्सकीय स्थिति के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है। फिलहाल, मामले में अदालत द्वारा जमानत खारिज किए जाने के बाद अगली सुनवाई 5 नवंबर को होनी है। आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर आगे की कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगी।