दमोह। आमजन को राजस्व प्रकरणों के निराकरण के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनके आवेदनों पर समय-सीमा में पारदर्शी एवं विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित हो, इसके लिए दमोह जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव के निर्देश पर तहसील दमोह के सभी छह न्यायालयों का निरीक्षण कराया गया। निरीक्षण में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद तहसीलदार दमयंती नगर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। वहीं, एसडीएम दमोह को पद से हटाते हुए उनके विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। संबंधित रीडर को भी निलंबित किया गया है, जबकि सात अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि निरीक्षण के दौरान कई गंभीर अनियमितताएं सामने आई हैं। इनमें अधिकारिता के बिना आदेश पारित करना, आवेदकों को सुनवाई का अवसर दिए बिना मनमाने तरीके से आवेदन निरस्त करना और प्रकरणों को नस्तीबद्ध करना शामिल है। इसके अलावा, कुछ मामलों में जुर्माना आरोपित किए जाने के बावजूद राशि जमा कराए बिना ही प्रकरणों को दाखिल-दफ्तर अथवा नस्तीबद्ध कर दिया गया। इन मामलों में शासन को वित्तीय क्षति होने की आशंका जताई गई है।
जनसुनवाई में लगातार मिल रही थीं शिकायतें
कलेक्टर ने बताया कि जनसुनवाई के दौरान राजस्व प्रकरणों के निराकरण और संबंधित कार्यालयों की कार्यप्रणाली को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। इसके बाद एसडीएम न्यायालय, तहसीलदार न्यायालय और राजस्व निरीक्षक (आरआई) कार्यालयों की एक साथ जांच कराई गई। जांच की जिम्मेदारी अपर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टरों और तहसीलदारों को सौंपी गई थी। विस्तृत जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई की गई।
एसडीएम और तहसीलदार का प्रभार बदला
प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु बनाए रखने के लिए डिप्टी कलेक्टर संजय दुबे को एसडीएम दमोह का प्रभार सौंपा गया है। वहीं, दमोह नगर में पहले से पदस्थ रघुनंदन चतुर्वेदी को तहसीलदार का प्रभार दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि राजस्व प्रकरणों का निराकरण प्रभावित न हो और आमजन को कार्यालयों में अनावश्यक परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।
सात अधिकारियों-कर्मचारियों से मांगा जवाब
गंभीर अनियमितताओं के मामले में सात अधिकारियों-कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। उनके जवाब प्राप्त होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जांच में सामने आई अनियमितताओं को गंभीरता से लिया गया है और संबंधित मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
जनसेवा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश
कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को आमजन की समस्याओं का तत्परता, पारदर्शिता और विधिसम्मत तरीके से निराकरण करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि नागरिकों को अपने प्रकरणों के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए। आमजन की सेवा और शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं को धरातल पर उतारना प्रत्येक अधिकारी-कर्मचारी की जिम्मेदारी है।
