नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्ष का विरोध प्रदर्शन मंगलवार को दिल्ली में सड़क पर उतर आया। INDIA ब्लॉक के सांसदों ने संसद के मकर द्वार से चुनाव आयोग के कार्यालय तक ‘सेव डेमोक्रेसी मार्च’ निकाला। विपक्षी दलों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और SIR प्रक्रिया को लेकर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। मार्च को पुलिस ने चुनाव आयोग मुख्यालय से पहले रोक दिया, जिसके बाद विपक्षी सांसदों ने सड़क पर धरना दिया।

मार्च में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी, कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव, शिवसेना (UBT) सांसद संजय राउत, प्रियंका गांधी वाड्रा, टीएमसी नेता अभिषेक बनर्जी और डेरेक ओ’ब्रायन समेत कई विपक्षी नेता शामिल हुए। विपक्षी सांसद मकर द्वार से आगे बढ़ते हुए निर्वाचन सदन की ओर जा रहे थे।

19 विपक्षी दलों के सांसदों ने लिया हिस्सा

विपक्ष के मुताबिक मार्च में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, टीएमसी, NCP (SP), शिवसेना (UBT), RJD, CPM, CPI, NC, PDP, JMM, CPI-ML, IUML, KC (M), MDMK, VCK, RSP, AIFB और KC (J) के सांसद शामिल हुए। हालांकि, रिपोर्टों के मुताबिक INDIA ब्लॉक के सभी दल इस मार्च में शामिल नहीं हुए थे।

आकाशवाणी भवन के पास रोका गया मार्च

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को संसद मार्ग पर नीति आयोग और आकाशवाणी भवन के बीच रोक दिया। इसके बाद राहुल गांधी समेत विपक्षी सांसदों ने वहीं धरना शुरू कर दिया। इलाके में पहले से भारी सुरक्षा व्यवस्था और बैरिकेडिंग की गई थी।

राहुल गांधी बोले- ‘Gyanesh, it’s done bro’

प्रदर्शन के दौरान राहुल गांधी बैरिकेड पर चढ़े और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। बाद में उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “Gyanesh, it’s done bro. Time to resign.” पुलिस ने राहुल गांधी और प्रियंका गांधी समेत कुछ नेताओं को हिरासत में लिया। बाद में दोनों नेताओं ने आकाशवाणी भवन परिसर में जाने का प्रयास भी किया।

पवन खेड़ा बोले- यहीं इंतजार करेंगे

कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने आकाशवाणी भवन परिसर से कहा कि चुनाव आयोग का कार्यालय नजदीक होने के बावजूद विपक्षी नेताओं को वहां जाने की अनुमति नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि विपक्षी सांसद यहीं इंतजार करेंगे और अपना विरोध जारी रखेंगे। विपक्ष SIR प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठा रहा है। वहीं चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को कानूनी प्रक्रिया के तहत और सर्वसम्मति से लिया गया बताया है।