वाशिंगटन: तिब्बत पर राजनीतिक नियंत्रण मजबूत करने के लिए चीन की नीतियों को लेकर एक नई रिपोर्ट में गंभीर दावा किया गया है। वाशिंगटन स्थित अधिकार संगठन इंटरनेशनल कैंपेन फॉर तिब्बत (ICT) की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन तिब्बत में महत्वपूर्ण प्रशासनिक और निर्णय लेने वाले पदों पर तिब्बतियों की भागीदारी लगातार सीमित कर रहा है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन नियुक्तियों, नए कानूनों और कम्युनिस्ट पार्टी के निर्देशों के जरिए तिब्बत पर अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर रहा है। इससे महत्वपूर्ण नेतृत्व पदों पर तिब्बतियों की हिस्सेदारी कम होती जा रही है।

240 वरिष्ठ पदों में सिर्फ 62 पर तिब्बती

ICT की रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2026 में प्रांतीय और काउंटी स्तर की पार्टी, सरकार, सुरक्षा और न्यायपालिका से जुड़ी 10 संस्थाओं में वरिष्ठ नेतृत्व के कुल 240 पदों का विश्लेषण किया गया। इनमें सिर्फ 62 पदों पर तिब्बती अधिकारी थे, जबकि 178 पदों पर गैर-तिब्बती नियुक्त थे। इस हिसाब से वरिष्ठ नेतृत्व के इन पदों में तिब्बतियों की हिस्सेदारी महज 25.8 प्रतिशत रही, जबकि गैर-तिब्बतियों की हिस्सेदारी 74.2 प्रतिशत थी।

अमेरिका से तिब्बती समुदाय के लिए सहायता बहाल करने की मांग

ICT ने अमेरिकी संसद से भारत और नेपाल में रह रहे तिब्बती समुदायों के लिए मानवीय सहायता और अन्य सहयोग का पूरा वित्त पोषण बहाल करने की मांग की है। संगठन ने केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (CTA) की क्षमता बढ़ाने के प्रयासों को भी समर्थन देने की अपील की है। CTA तिब्बत की निर्वासित सरकार है, जिसका मुख्यालय भारत के धर्मशाला में है। यह दुनिया भर में तिब्बती प्रवासियों का प्रतिनिधित्व करने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और संस्कृति से जुड़ी सामुदायिक सेवाएं संचालित करता है।

‘अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट’ पर जोर

ICT के अनुसंधान एवं निगरानी प्रमुख भुचुंग त्सेरिंग ने अमेरिकी संसद से दोनों दलों के समर्थन वाले ‘अश्योरिंग द फ्यूचर ऑफ तिब्बत एक्ट’ (AFTA) को पारित करने की अपील की। उनका कहना है कि यह कानून CTA को तिब्बती लोगों के लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित प्रतिनिधि के तौर पर अधिक वैधता प्रदान कर सकता है।

त्सेरिंग ने भारत की भूमिका का भी उल्लेख करते हुए कहा कि भारत तिब्बती समुदाय को ऐसा आधार उपलब्ध कराता है, जहां से वे अपनी गतिविधियां संचालित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में तिब्बत के मुद्दे को दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों का समर्थन मिला है।