सागर: सागर जिले में जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामने आई एक सरकारी जांच रिपोर्ट के मुताबिक, जिस ‘बाम्बे व्हिस्की’ ब्रांड की शराब के सेवन से लोगों की मौत होने की बात सामने आई है, उसी ब्रांड को घटना से कुछ दिन पहले आबकारी विभाग की जांच में मानक और पीने योग्य बताया गया था।
दरअसल, 3 सितंबर 2026 को अमानक और जहरीली शराब की बिक्री से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद आबकारी विभाग में हड़कंप मच गया था। इसके बाद विभाग की ओर से शराब के नमूनों की जांच कराई गई। जांच के बाद 5 सितंबर 2026 को शासकीय विदेशी मदिरा भाण्डागार, सागर के प्रभारी अधिकारी ने सहायक आबकारी आयुक्त को आधिकारिक रिपोर्ट सौंपी। इसी रिपोर्ट में ‘बाम्बे व्हिस्की’ से जुड़े नमूनों की जांच के निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं।
रिपोर्ट में शराब को बताया गया था मानक
आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, ‘बाम्बे व्हिस्की’ के जिन नमूनों की जांच की गई, वे निर्माता इकाई M/S Associated Alcohols & Breweries Limited द्वारा सप्लाई किए गए थे। रिपोर्ट में ठेका सत्र 2025-26 और वर्तमान सत्र 2026-27, दोनों की पैकेजिंग को मानक श्रेणी का बताया गया। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया कि दोनों तरह के नगों में बाम्बे व्हिस्की मदिरा मानक श्रेणी की और पीने योग्य पाई गई।
अब उठ रहे जांच पर गंभीर सवाल
इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर आबकारी विभाग की जांच में शराब को मानक और पीने योग्य पाया गया था, तो उसी ब्रांड के सेवन के बाद मौतें कैसे हुईं? क्या जांच के दौरान लिए गए नमूने सही थे या फिर बाद में शराब में किसी तरह की मिलावट की गई? जहरीली शराब से हुई मौतों के मामले में अब यह सरकारी रिपोर्ट जांच की दिशा में अहम कड़ी साबित हो सकती है। पुलिस और प्रशासन की जांच में यह स्पष्ट होना बाकी है कि मौतों के लिए जिम्मेदार शराब में कौन-सा पदार्थ था और उसकी सप्लाई कहां से हुई।
आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल
एक ओर जहरीली शराब से मौतों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है, वहीं दूसरी ओर कुछ दिन पहले जारी हुई आबकारी विभाग की रिपोर्ट ने विभाग की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि जिस शराब को जांच में सुरक्षित बताया गया था, वही शराब मौतों की वजह कैसे बनी।

