MP Ujjain News: उज्जैन: मध्यप्रदेश के उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के पहुंच मार्ग से लगे बेगम बाग क्षेत्र में एक बार फिर अवैध निर्माण के खिलाफ प्रशासन की बड़ी कार्रवाई हुई। शनिवार सुबह करीब 8 बजे शुरू हुई कार्रवाई में करीब 15 बिल्डिंगों को बुलडोजर से जमींदोज किया गया। कार्रवाई के दौरान भारी पुलिस बल तैनात रहा और स्थिति शांतिपूर्ण बनी रही।
बताया गया कि जिन संपत्तियों पर कार्रवाई की गई, वे उज्जैन विकास प्राधिकरण की जमीन पर बनी थीं। इन भूखंडों को 30 साल की लीज पर आवासीय उपयोग के लिए दिया गया था, लेकिन आरोप है कि इनका नियमों के विपरीत व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा था। लीज अवधि समाप्त होने के बाद नवीनीकरण नहीं कराया गया।
कोर्ट से स्टे खारिज होने के बाद कार्रवाई
उज्जैन विकास प्राधिकरण की ओर से संबंधित भूखंड धारकों को कई बार नोटिस जारी किए गए। इसके बाद मामला न्यायालय तक पहुंचा। अलग-अलग स्तरों पर चली कानूनी प्रक्रिया के दौरान मिले स्टे को बाद में न्यायालय ने खारिज कर दिया। स्टे हटने और नोटिस की समय सीमा समाप्त होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई शुरू की।
अधिकारियों के मुताबिक कार्रवाई से पहले भवन मालिकों से बातचीत भी की गई और उन्हें न्यायालय की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी गई। इसके बाद कई लोगों ने खुद ही अपनी इमारतें खाली करना शुरू कर दिया, जिसके चलते कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से आगे बढ़ी।
48 भूखंडों पर बनी थीं 106 बिल्डिंग
मामला वर्ष 1985 में आवंटित किए गए 48 आवासीय भूखंडों से जुड़ा है। प्रत्येक भूखंड का क्षेत्रफल करीब 2400 वर्गफीट बताया गया है। आरोप है कि बाद में इन भूखंडों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर करीब 106 निर्माण कर दिए गए।
उज्जैन विकास प्राधिकरण की कार्रवाई के तहत पिछले करीब एक साल में सात चरणों में 72 बिल्डिंग पहले ही हटाई जा चुकी हैं। आज की कार्रवाई के बाद अब तक कुल 86 बिल्डिंगों को जमींदोज किया जा चुका है। शेष 20 निर्माणों पर भी कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद कार्रवाई की जाएगी।
महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग पर ट्रैफिक बंद
बेगम बाग क्षेत्र को संवेदनशील इलाका माना जाता है। कार्रवाई को देखते हुए महाकाल मंदिर पहुंच मार्ग के इस हिस्से को वाहनों और श्रद्धालुओं के लिए बंद रखा गया। लोगों की आवाजाही के लिए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल किया जा रहा है। मौके पर पुलिस बल की तैनाती के चलते किसी तरह का विरोध प्रदर्शन सामने नहीं आया। प्रशासन का कहना है कि जिन निर्माणों पर न्यायालय से राहत नहीं मिली है और जिनकी कानूनी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, उन्हें नियमानुसार हटाया जा रहा है।
