भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मास्टरप्लान और परिसीमन के मुद्दे पर भाजपा के भीतर असंतोष सामने आया है। भोपाल महानगर की कोर कमेटी की बैठक में सांसद, मंत्रियों, पूर्व विधायकों और वरिष्ठ पदाधिकारियों ने प्रशासनिक फैसलों और नीतियों पर सवाल उठाए। बैठक में मास्टरप्लान की खामियों से लेकर विधानसभा क्षेत्रों के परिसीमन तक के मुद्दे उठाए गए।

पूर्व विधायक ध्रुव नारायण सिंह ने भोपाल के मौजूदा मास्टरप्लान को पूरी तरह रद्द करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि मास्टरप्लान में चुनिंदा अधिकारियों की कॉलोनियों का एफएआर बढ़ाया गया है, जबकि आम जनता की जरूरतों की अनदेखी हुई है।

एक लाख व्यापारियों की परेशानी का मुद्दा उठा

पूर्व जिला अध्यक्ष विकास विरानी ने कहा कि मास्टरप्लान की खामियों के कारण शहर के करीब एक लाख व्यापारी परेशान हैं। उन्होंने इस समस्या का ठोस समाधान करने की जरूरत बताई।

परिसीमन पर सांसद आलोक शर्मा ने रखे सुझाव

बैठक में परिसीमन को लेकर भी चर्चा हुई। सांसद आलोक शर्मा ने सुझाव दिया कि विधानसभा क्षेत्रों में मुस्लिम आबादी का संतुलित वितरण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि 25 साल पहले हुए परिसीमन के दौरान मुस्लिम आबादी भोपाल उत्तर विधानसभा क्षेत्र तक सीमित होकर रह गई थी।

मंत्रियों ने भी जताई अपने क्षेत्रों को लेकर आपत्ति

मंत्री विश्वास सारंग और कृष्णा गौर ने भी अपने-अपने विधानसभा क्षेत्रों के कुछ इलाकों को दूसरे क्षेत्रों में शामिल किए जाने या शिफ्ट किए जाने को लेकर शिकायतें रखीं। बैठक में नेताओं ने परिसीमन से जुड़े बदलावों पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

बैठक में खुलकर सामने आया असंतोष

भाजपा की कोर कमेटी की बैठक में मास्टरप्लान और परिसीमन जैसे मुद्दों पर वरिष्ठ नेताओं के सवाल उठाने से पार्टी के भीतर असंतोष की चर्चा तेज हो गई है। बैठक में प्रशासनिक फैसलों और नीतियों में बदलाव की जरूरत पर जोर दिया गया।