नई दिल्ली। 45 मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने और हिरासत में लिए गए लोगों के मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है। जस्टिस जॉयमाला बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ दोनों मामलों की सुनवाई कर रही है। अदालत में अवमानना याचिका के साथ-साथ हिरासत में लिए गए लोगों के संबंध में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर भी सुनवाई हो रही है।

जस्टिस बागची बोले- असाधारण स्थिति में हम यहां बैठे हैं

सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाला बागची ने कहा कि यह एक असाधारण स्थिति है और पीठ के सामने दो याचिकाएं हैं। उन्होंने कहा कि कई वकील इस मामले में अपनी बात रखना चाहते हैं और सभी को अवसर दिया जाएगा। वरिष्ठ अधिवक्ता केके वेणुगोपाल ऑनलाइन जुड़े दिखाई दिए, जिसके बाद पीठ ने उन्हें सबसे पहले सुनने की बात कही।

वेणुगोपाल ने मामले में पेश होने की बात कही तो जज ने कहा कि वह अवमानना की मांग कर रहे हैं और ऐसी अन्य याचिकाएं भी हैं। पीठ ने संकेत दिया कि इन याचिकाओं को सोमवार को सुना जा सकता है और नोटिस जारी करने से पहले सॉलिसिटर जनरल को सुना जाएगा।

कपिल सिब्बल बोले- अवमानना के अलावा भी कई मुद्दे

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि मामले में सिर्फ अवमानना का मुद्दा नहीं है, बल्कि अन्य महत्वपूर्ण बातें भी हैं। उन्होंने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका और धारा 163 लागू किए जाने का मुद्दा उठाया।

जज ने पूछा कि क्या धारा 163 चार किलोमीटर के दायरे में लागू की गई थी। सिब्बल ने हां में जवाब देते हुए कहा कि इंटरनेट पर भी रोक लगाई गई थी। उन्होंने कहा कि यह मामला ‘अनुराधा भसीन’ फैसले के दायरे में आता है, जिसमें इंटरनेट प्रतिबंधों से जुड़े मुद्दों पर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण निर्देश दिए थे।

‘45 मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए, यह आपकी अवमानना है’

कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बावजूद 45 मेट्रो स्टेशन बंद रखे गए। उन्होंने कहा कि चार किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट भी बंद रखा गया। सिब्बल ने इसे अदालत की अवमानना बताया।

उन्होंने सुनवाई के लिए सुप्रीम कोर्ट का शुक्रिया अदा करते हुए कहा कि इस परिस्थिति में अदालत का हस्तक्षेप महत्वपूर्ण है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह देश सेवा के लिए हमेशा मौजूद है।

शादान फरासत ने पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील शादान फरासत ने अदालत को बताया कि उन्हें चलती बस में फेंका गया। उन्होंने कहा कि यह केवल उनके साथ हुआ मामला नहीं है, बल्कि स्थिति ऐसी बन गई थी कि देश पुलिस स्टेट बनने से सिर्फ एक कदम दूर था। उन्होंने नागरिकों के अधिकारों की रक्षा की मांग की। याचिकाकर्ताओं की ओर से दिल्ली में बैरिकेड हटाने और सभी ट्रेन तथा मेट्रो रूट को सुचारू करने की मांग भी की गई।

वकीलों को थाने में क्लाइंट से नहीं मिलने देने का आरोप

सुनवाई के दौरान एन. हरिहरन ने कहा कि पिछले दिन वकीलों को सुप्रीम कोर्ट के बाहर भी रोका गया था। याचिकाकर्ताओं की ओर से पुलिसकर्मियों द्वारा नेम प्लेट या बैज नहीं लगाए जाने की जानकारी भी अदालत को दी गई और इस संबंध में निर्देश जारी करने की मांग की गई।

याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि वकीलों को थाने में अपने क्लाइंट से मिलने की अनुमति नहीं दी जा रही थी। साथ ही पुलिसकर्मियों पर वकीलों को ही एफआईआर करने की धमकी देने के आरोप भी लगाए गए। मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी है।