बस्तर में लोकतंत्र की नई पहचान: माओवादी ठिकानों पर बनेंगे 1200+ ‘अमर बलिदानी स्मारक’

A New Identity for Democracy in Bastar: रायपुर। बस्तर संभाग के जिन दुर्गम इलाकों में कभी माओवादियों के समानांतर शासन के किले हुआ करते थे, आज वहां लोकतंत्र की विजय का प्रतीक बुलंद हो रहा है। सुरक्षा बलों द्वारा माओवादियों के बुनियादी ढांचे को ध्वस्त करने के बाद अब उन स्थानों पर बलिदानियों की स्मृति में स्मारकों का निर्माण किया जा रहा है।
शासन की योजना के अनुसार, बस्तर के विभिन्न गांवों में कुल 1,200 से अधिक स्मारक बनाए जाएंगे, जो आने वाली पीढ़ियों को जवानों के साहस और बलिदान से परिचित कराएंगे।
“अमर बलिदानी स्मारक” स्थापित करने का निर्णय
शासन ने सभी माओवादी स्मारकों को ध्वस्त कर उनके स्थान पर सुरक्षा बलों के बलिदानियों की प्रतिमाएं और “अमर बलिदानी स्मारक” स्थापित करने का निर्णय लिया है। पंचायत विभाग ने इसके लिए राशि स्वीकृत कर दी है।
इसका मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों को जवानों की शौर्यगाथा से परिचित कराना और क्षेत्र में लोकतंत्र की जड़ें मजबूत करना है।
ताड़मेटला और बुरकापाल में भव्य स्मारक तैयार
माओवादी हिंसा के दंश को झेलने वाले सुकमा जिले में दो बड़े स्मारकों का लोकार्पण किया गया है। छह अप्रैल 2026 को ताड़मेटला (गडगडमेटा) में उस ऐतिहासिक स्थल पर स्मारक का उद्घाटन हुआ, जहां 2010 में 76 जवानों ने सर्वोच्च बलिदान दिया था।
इसी तरह बुरकापाल (चिंतागुफा) में भी 25 बलिदानियों को समर्पित स्मारक राष्ट्र को सौंपा गया। 24 अप्रैल 2017 को सड़क निर्माण की सुरक्षा में तैनात इन जवानों पर माओवादियों ने घात लगाकर हमला किया था। अब ये स्मारक प्रत्येक बलिदानी की संक्षिप्त जानकारी के साथ उनके पराक्रम की गाथा बयां कर रहे हैं।
1,200 से अधिक गांवों में गूंजेगा शौर्य
बस्तर को 31 मार्च को हथियारबंद माओवादियों से मुक्त घोषित करने के बाद अब गांव-गांव में स्मारकों के निर्माण की तैयारी है। नारायणपुर के ओरछा में उस शिक्षक का भी स्मारक बनाने की तैयारी है, जिसने माओवादियों के डर को दरकिनार कर तिरंगा फहराया था और बाद में अपनी जान गंवाई।
जगदलपुर में “अमर जवान शहीद परिसर” के माध्यम से संभाग के सभी बलिदानी परिवारों को संगठित कर उन्हें सहायता और सम्मान देने की योजना पर कार्य चल रहा है।




