भोपाल। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत के उज्जैन में दिए अहंकार संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया दी है। दिग्विजय सिंह ने सोशल मीडिया पर भागवत के भाषण का वीडियो साझा करते हुए कहा कि वे इस बात से सहमत हैं कि जिसका उदय होता है, उसका अस्त भी होता है और किसी को अहंकार में नहीं डूबना चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने अपनी पोस्ट में लिखा कि काश, सभी बड़े लोग इस बात को समझें। उन्होंने इसके साथ धर्म और राजनीति के संबंध को लेकर भी अपनी बात रखी। दिग्विजय सिंह के मुताबिक धर्म लोगों को जोड़ता है, जबकि राजनीति लोगों को विभाजित करती है। उन्होंने कहा कि धर्म का इस्तेमाल राजनीति में नहीं होना चाहिए।
दिग्विजय ने भागवत से मांगा समर्थन
दिग्विजय सिंह ने धर्म की तुलना समुद्र से करते हुए कहा कि सभी धर्म इंसानियत के रास्ते पर चलने की सीख देते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म सभी को जोड़ने का काम करता है और इसे राजनीति में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
दिग्विजय सिंह ने मोहन भागवत से इस विचार का समर्थन करने की अपील भी की। उन्होंने अपनी पोस्ट में कहा कि यदि भागवत इस बात से सहमत हैं तो उन्हें इसका समर्थन करना चाहिए। दिग्विजय के मुताबिक ऐसा होने से उनकी विश्वसनीयता बढ़ेगी, जबकि समर्थन नहीं करने पर कथनी और करनी में अंतर दिखाई देगा।
उज्जैन में क्या बोले थे मोहन भागवत?
मोहन भागवत ने 18 सितंबर को उज्जैन में आयोजित युवा धर्म संसद में युवाओं को संबोधित किया था। अपने संबोधन में उन्होंने अहंकार से बचने की बात कही। उन्होंने कहा कि अहंकार में व्यक्ति यह मानने लगता है कि सब कुछ उसके नियंत्रण में है और हर चीज उसकी इच्छा के अनुसार होनी चाहिए, जबकि वास्तविकता ऐसी नहीं है।
भागवत ने सूर्य का उदाहरण देते हुए कहा कि जिसका उदय होता है, उसका अस्त भी होता है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने अपने संबोधन में किसी राजनीतिक नेता का नाम नहीं लिया था। बाद में सोशल मीडिया पर उनके बयान के अलग-अलग राजनीतिक अर्थ निकाले गए।
धर्म को लेकर भी रखी बात
युवा धर्म संसद में भागवत ने धर्म को केवल पूजा-पद्धति तक सीमित नहीं रखने की बात कही। उन्होंने धर्म को जीवन और आचरण से जोड़ते हुए युवाओं के बीच धर्म की अवधारणा पर चर्चा की। कार्यक्रम में करीब 1,700 युवा शामिल हुए थे।
दिग्विजय सिंह की प्रतिक्रिया ऐसे समय आई है जब मोहन भागवत के उज्जैन भाषण के बाद उनके ‘उदय और अस्त’ वाले बयान को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। हालांकि भागवत के मूल संबोधन में किसी नेता का नाम लिए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।
