MP Assembly Winter Session 2026: भोपाल: मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र 2026 की तारीखों का ऐलान हो गया है। विधानसभा का पांच दिवसीय सत्र 7 दिसंबर से शुरू होकर 11 दिसंबर तक चलेगा। राज्यपाल मंगुभाई पटेल की मंजूरी के बाद विधानसभा सचिवालय ने 16वीं विधानसभा के 12वें सत्र की अधिसूचना जारी कर दी है। इस दौरान सदन की पांच बैठकें होंगी और किसी भी दिन अवकाश नहीं रहेगा।
पांच दिवसीय इस सत्र में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व वाली सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट पेश करने की तैयारी में है। इसके साथ ही सरकार कई महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को भी सदन में आगे बढ़ा सकती है। अनुपूरक बजट को लेकर वित्त विभाग द्वारा तैयारियां की जा रही हैं।
7 से 10 दिसंबर तक प्रश्नोत्तर और शासकीय कार्य
विधानसभा सचिवालय द्वारा जारी कार्यक्रम के अनुसार, सोमवार 7 दिसंबर से सत्र की शुरुआत होगी। पहले दिन प्रश्नोत्तर के बाद शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे। इसी तरह मंगलवार 8 दिसंबर, बुधवार 9 दिसंबर और गुरुवार 10 दिसंबर को भी प्रश्नोत्तर के बाद शासकीय कार्य निर्धारित किए गए हैं। इन चारों दिनों सदन में विधायी और अन्य शासकीय कामकाज होंगे।
अंतिम दिन दोपहर 1:30 बजे तक होंगे शासकीय कार्य
शुक्रवार 11 दिसंबर को सत्र का अंतिम दिन होगा। इस दिन भी सबसे पहले प्रश्नोत्तर होंगे। इसके बाद दोपहर 1:30 बजे तक शासकीय कार्य संपादित किए जाएंगे। दोपहर 1:30 बजे के बाद सदन में अशासकीय कार्यों के लिए समय निर्धारित किया गया है। विधानसभा सचिवालय ने विधायकों से अशासकीय विधेयकों और संकल्पों से संबंधित सूचनाएं निर्धारित समय-सीमा में भेजने को कहा है।
अनुपूरक बजट पेश करने की तैयारी में सरकार
शीतकालीन सत्र के दौरान सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का दूसरा अनुपूरक बजट पेश कर सकती है। इसके माध्यम से विभिन्न विभागों की अतिरिक्त वित्तीय जरूरतों के लिए बजट प्रावधान किए जा सकते हैं। इसके अलावा सरकार की ओर से कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश करने और उन पर चर्चा कराने की तैयारी भी है। हालांकि, विधेयकों और अन्य सरकारी कामकाज का विस्तृत ब्योरा सदन की कार्यसूची से स्पष्ट होगा।
खाद संकट और बिजली कटौती पर विपक्ष के सवाल
इस बार शीतकालीन सत्र के हंगामेदार रहने के आसार हैं। विपक्ष ने सरकार को घेरने के लिए कई मुद्दों पर तैयारी शुरू कर दी है। प्रदेश में खाद की कमी और किसानों को हो रही परेशानियों का मामला सदन में उठ सकता है। इसके अलावा बिना सूचना बिजली कटौती और किसानों को पर्याप्त बिजली नहीं मिलने जैसे मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांगा जा सकता है।
जहरीली शराब और नियुक्तियों का मुद्दा भी उठ सकता है
वहीं, कांग्रेस जहरीली शराब से हुई मौतों और अवैध शराब के कारोबार को लेकर भी सरकार पर सवाल खड़े कर सकती है। इसके साथ ही सरकारी नौकरियों में चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति नहीं मिलने का मुद्दा भी विधानसभा में गूंजने की संभावना है। विपक्ष इन मामलों को लेकर सरकार से जवाब और कार्रवाई की मांग कर सकता है।
कुल मिलाकर पांच दिनों तक चलने वाले इस सत्र में सरकार के सामने अनुपूरक बजट और विधायी कार्यों को पूरा करने की चुनौती होगी, जबकि विपक्ष खाद संकट, बिजली कटौती, शराब से जुड़े मामलों और नियुक्तियों जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
