शिमला: हिमाचल प्रदेश की रामपुर विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक नंद लाल का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। जानकारी के मुताबिक, नंद लाल लंबे समय से किडनी और प्रॉस्टेट की बीमारी से जूझ रहे थे। उनका कई वर्षों से डायलिसिस चल रहा था। बताया जा रहा है कि मंगलवार को अचानक उनका हार्ट रेट कम हो गया, जिसके बाद उन्हें जीएमसी से करीब 3 बजे चमियाना शिफ्ट किया गया। हालांकि, आज सुबह 5:30 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू ने जताया दुख
हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने विधायक नंद लाल के निधन पर गहरा दुख व्यक्त किया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक पर पोस्ट कर कहा कि रामपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक एवं सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंद लाल के निधन का समाचार अत्यंत दुखद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नंद लाल अपने उसूलों पर अडिग रहने वाले और पार्टी के प्रति निष्ठावान नेता थे। उनका स्पष्ट विचारों वाला व्यक्तित्व हमेशा याद किया जाएगा। वह सार्वजनिक जीवन में समाज के प्रति समर्पित रहे। सीएम ने दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिवार को इस कठिन समय में धैर्य एवं संबल प्रदान करने की प्रार्थना की।
चार बार विधायक चुने गए थे नंद लाल
बता दें कि नंद लाल रामपुर विधानसभा क्षेत्र से लगातार चौथी बार विधायक चुने गए थे। वह हिमाचल प्रदेश राज्य वित्त आयोग के सातवें आयोग के अध्यक्ष भी थे। उन्होंने वर्ष 2007 में पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ा था। इसके बाद 2012, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज की। नंद लाल पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के करीबी माने जाते थे। वहीं, कांग्रेस में उन्हें पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रतिभा सिंह के समर्थक नेताओं में भी गिना जाता था।
16 अप्रैल 1954 को हुआ था जन्म
नंद लाल का जन्म 16 अप्रैल 1954 को रामपुर बुशहर के देवठी में हुआ था। उन्होंने हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में स्नातकोत्तर की पढ़ाई की थी। राजनीति में आने से पहले उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में सेवाएं दी थीं।
एसपीजी में भी निभाई थी अहम जिम्मेदारी
नंद लाल वर्ष 1985 में विशेष सुरक्षा समूह (एसपीजी) में शामिल हुए थे और वर्ष 1997 तक इस समूह में सेवाएं दीं। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री और पूर्व प्रधानमंत्री की सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियां निभाईं। उन्होंने कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में भी सुरक्षा संबंधी दायित्व संभाले। इनमें वर्ष 1982 के एशियाई खेल और 1983 में नई दिल्ली में आयोजित गुटनिरपेक्ष देशों की बैठक शामिल थी।
वर्ष 2007 में उन्होंने आईटीबीपी से स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर राजनीति में कदम रखा। इसके बाद कांग्रेस के टिकट पर रामपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत हासिल की।
