Rahul Gandhi

भोपाल: मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के बैहर-बिरसा क्षेत्र के आदिवासी बहुल गांवों में बच्चों की मौत का मामला अब सियासी मुद्दा बन गया है। करीब 30 आदिवासी बच्चों की मौत के दावे के बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए मामले को बेहद चिंताजनक बताते हुए बीमारी के साथ पेयजल, पोषण और समय पर इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए हैं।

राहुल गांधी ने सरकार पर साधा निशाना

राहुल गांधी ने शनिवार को एक्स पर पोस्ट कर बालाघाट में बच्चों की मौत को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बीमारी के साथ-साथ पीने के पानी, पोषण और समय पर इलाज जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी बच्चों के लिए गंभीर खतरा बन रहा है।

राहुल गांधी के बयान के बाद बालाघाट के बैगा आदिवासी बहुल इलाकों में बच्चों की मौत का मामला एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।

मई से सामने आने लगा था बच्चों के बीमार होने का सिलसिला

बालाघाट के बैगा आदिवासी बहुल गांवों में मई से बच्चों के बीमार होने और मौतों की खबरें सामने आने लगी थीं। शुरुआती जांच में कई बच्चों में मलेरिया की पुष्टि हुई थी।

उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक 16 अगस्त तक प्रभावित गांवों से 152 मरीज अस्पताल पहुंच चुके थे, जिनमें से 100 मरीज स्वस्थ होकर वापस लौट चुके थे। इस दौरान 2,780 लोगों की जांच की गई, जिसमें 236 लोगों में मलेरिया की पुष्टि हुई थी।

सिर्फ मलेरिया नहीं, दूसरे संक्रमणों की भी जांच

मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने बीमारी को केवल मलेरिया तक सीमित नहीं माना। प्रभावित बच्चों में खसरा और अन्य मौसमी एवं संक्रामक बीमारियों की भी जांच की गई।

ऐसे में बच्चों की मौत के पीछे किसी एक बीमारी को जिम्मेदार मानने के बजाय संक्रमण, कमजोर स्वास्थ्य और अन्य परिस्थितियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

कुपोषण और कमजोर स्वास्थ्य बना चिंता का कारण

प्रभावित आदिवासी गांवों में बच्चों की पोषण स्थिति को लेकर भी चिंता सामने आई है। गंभीर बीमारी से जूझ रहे बच्चों के लिए पर्याप्त पोषण और खाद्य सुरक्षा महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मौतों के बाद प्रशासन ने प्रभावित बैगा गांवों में स्वास्थ्य सेवाओं के साथ राशन, पानी और पोषण व्यवस्था की निगरानी बढ़ाई है। बच्चों की कमजोर प्रतिरोधक क्षमता को भी गंभीर संक्रमण के दौरान एक महत्वपूर्ण चुनौती माना जा रहा है।

पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल

मामले में पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था भी चर्चा के केंद्र में है। राहुल गांधी ने अपने बयान में पीने के पानी को लेकर सवाल उठाया है।

प्रभावित वनांचल क्षेत्रों में बीमारी सामने आने के बाद प्रशासन की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं के साथ पेयजल और स्वच्छता व्यवस्था की निगरानी भी बढ़ाई गई है। हालांकि बच्चों की मौत के वास्तविक कारणों को लेकर जांच की स्थिति महत्वपूर्ण होगी।

दुर्गम इलाकों में इलाज तक पहुंच बनी चुनौती

बैहर-बिरसा क्षेत्र का बड़ा हिस्सा वनांचल और दुर्गम इलाकों में आता है। ऐसे में बीमार बच्चों को समय पर स्वास्थ्य केंद्र या अस्पताल तक पहुंचाना भी चुनौतीपूर्ण रहा है।

बीमारी और मौतों की खबर सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित गांवों में सर्वे, स्क्रीनिंग और उपचार की गतिविधियां तेज कीं। स्वास्थ्य टीमों की ओर से ग्रामीणों की जांच और बीमार लोगों के उपचार पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

30 बच्चों की मौत के दावे पर बढ़ा विवाद

4 सितंबर तक करीब 30 बच्चों की मौत की बात सामने आने के बाद मामले ने और गंभीर रूप ले लिया। बच्चों की मौत के विरोध में एक दिन पहले बालाघाट में बंद भी रखा गया था।

हालांकि मौतों के आंकड़े को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। सरकारी और स्थानीय स्तर पर बताए जा रहे आंकड़ों में अंतर होने के कारण पूरे मामले की तथ्यात्मक स्थिति को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला, जांच पर भी नजर

बच्चों की मौत का मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंच चुका है। अदालत ने याचिकाकर्ता से केवल अखबारों में प्रकाशित खबरों के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय मौके पर जाकर तथ्य जुटाने को कहा है।

ऐसे में अब पूरे मामले में वास्तविक मौतों की संख्या, बच्चों की बीमारी, संक्रमण के कारण और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति को लेकर तथ्य सामने आने का इंतजार है। फिलहाल राहुल गांधी के बयान के बाद यह मामला एक बार फिर मध्य प्रदेश की सियासत में गरमा गया है।