भोपाल: प्रस्तावित भोपाल मास्टर प्लान 2026 के ड्राफ्ट के विरोध में बड़ी संख्या में किसान अपनी मांगों को लेकर नीलबड़ पहुंचे। पुलिस और प्रशासन ने किसानों को नीलबड़ में ही रोक दिया। इसके बाद मौके पर पहुंचे अधिकारियों ने किसानों से आवेदन लेकर उनकी मांगों और आपत्तियों को शासन स्तर तक पहुंचाने का आश्वासन दिया। किसानों ने कृषि भूमि का लैंडयूज नहीं बदलने, 66 ग्राम पंचायतों की सहमति लेने और ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुविधाएं बेहतर करने की मांग उठाई।

किसानों ने नगर तथा ग्राम निवेश विभाग के संयुक्त संचालक को सौंपे गए आवेदन में कहा कि भोपाल तालाब के आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में उनकी कृषि भूमि का भू-उपयोग नहीं बदला जाना चाहिए। किसानों के अनुसार, वर्ष 1995 के मास्टर प्लान और वर्ष 2019 के ड्राफ्ट में उनकी जमीन कृषि भूमि के रूप में दर्ज थी। उनका कहना है कि खेती उनकी आजीविका का प्रमुख साधन है, इसलिए जमीन का भू-उपयोग कृषि ही रखा जाए।

66 ग्राम पंचायतों की सहमति लेने की मांग

किसानों ने मास्टर प्लान तैयार करने की प्रक्रिया में स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई। उनका कहना है कि भोपाल क्षेत्र की 66 ग्राम पंचायतों में ग्राम सभाएं आयोजित कराकर प्रस्तावित मास्टर प्लान पर लोगों की सहमति ली जाए। किसानों ने आरोप लगाया कि ड्राफ्ट तैयार करने में ग्राम पंचायतों की सहमति लेने की प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

तीन सड़क मार्गों को लेकर भी उठाई मांग

किसानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर करने की मांग की। इसमें भनोरी से इंटखेड़ी छाप तक प्रस्तावित सड़क मार्ग, सिकंदराबाद पंचायत के रसूलिया गोसाईं से मुगालिया छाप की मुख्य सड़क तक संपर्क मार्ग और सालिखेड़ी से मुगालिया छाप जाने वाले मार्ग की चौड़ाई बढ़ाने की मांग शामिल है।

नीलबड़ में रोका गया काफिला, अधिकारियों ने लिया आवेदन

किसानों के नीलबड़ पहुंचने की सूचना पर पुलिस और प्रशासन ने मौके पर व्यवस्था की थी। किसानों को आगे बढ़ने से रोकने के बाद संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचे और उनका आवेदन प्राप्त किया। अधिकारियों ने आश्वासन दिया कि किसानों की मांगों और आपत्तियों को शासन स्तर तक पहुंचाकर उन पर विचार कराया जाएगा।

मास्टर प्लान के ड्राफ्ट पर फैसले का इंतजार

भोपाल मास्टर प्लान 2026 को लेकर किसानों ने कृषि भूमि के संरक्षण, ग्राम पंचायतों की सहमति और ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दे उठाए हैं। अब किसानों की ओर से सौंपे गए आवेदन पर शासन स्तर पर होने वाली कार्रवाई और मास्टर प्लान के ड्राफ्ट में उनकी मांगों को शामिल किए जाने को लेकर नजर रहेगी।