भोपाल। मध्य प्रदेश की राजनीति में इन दिनों युवाओं को साधने की कवायद तेज हो गई है। 2027 के नगरीय निकाय चुनाव और 2028 के विधानसभा चुनावों को देखते हुए कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने युवा वोटरों पर अपना फोकस बढ़ा दिया है। सितंबर के इसी सप्ताह कांग्रेस नेता राहुल गांधी, RSS प्रमुख मोहन भागवत और भाजपा के प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन के मध्य प्रदेश दौरे ने प्रदेश की सियासत को गरमा दिया है।

एक सप्ताह में तीन बड़े नेताओं का दौरा

युवाओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कांग्रेस और भाजपा-RSS की ओर से बड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कांग्रेस नेता राहुल गांधी 19 सितंबर को इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं से संवाद करेंगे। कांग्रेस के मुताबिक, कार्यक्रम के लिए बड़ी संख्या में युवाओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है।

वहीं भाजपा के प्रदेश प्रभारी नितिन नबीन 17 सितंबर को मध्य प्रदेश के दौरे पर पहुंच रहे हैं। उनका यह दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से शुरू होने वाले ‘सेवा संकल्प अभियान’ से जुड़ा है। इसी दौरान RSS प्रमुख मोहन भागवत भी 17 और 18 सितंबर को उज्जैन में रहेंगे। 18 सितंबर को वे ‘युवा धर्म संसद’ में युवाओं को संबोधित करेंगे।

भाजपा और RSS के कार्यक्रमों की टाइमिंग को राजनीतिक विश्लेषक कांग्रेस के युवा केंद्रित कार्यक्रम के समानांतर देख रहे हैं। माना जा रहा है कि दोनों खेमे युवाओं के बीच अपनी-अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हैं।

आखिर युवाओं पर इतना फोकस क्यों?

मध्य प्रदेश में युवा मतदाताओं की बड़ी संख्या राजनीतिक दलों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। 18 से 29 वर्ष की उम्र के करीब 1.5 करोड़ युवा मतदाता बताए जा रहे हैं, जो कुल मतदाताओं का लगभग 27 प्रतिशत हैं। यही वजह है कि आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक दल इस वर्ग को नजरअंदाज नहीं करना चाहते। हर चुनाव में नए युवा मतदाता जुड़ते हैं और उनकी प्राथमिकताएं चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती हैं।

हाल के वर्षों में प्रतियोगी परीक्षाओं, सरकारी भर्तियों और रोजगार से जुड़े मुद्दों को लेकर युवाओं में असंतोष भी देखने को मिला है। ऐसे में राजनीतिक दल युवाओं की नाराजगी को अपने पक्ष में करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

युवाओं के सामने सबसे बड़े मुद्दे क्या हैं?

राजनीतिक आयोजनों में युवाओं को लेकर बड़े दावे और वादे किए जा रहे हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर रोजगार और सरकारी भर्ती युवाओं की सबसे बड़ी चिंताओं में शामिल हैं। MPPSC समेत विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा समय पर परीक्षा, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और नियुक्ति की मांग करते रहे हैं। पेपर लीक और कानूनी विवादों के कारण भर्तियों में देरी भी युवाओं के बीच चिंता का विषय है।

इसके अलावा निजी क्षेत्र में कम वेतन, करियर ग्रोथ की कमी और छोटे शहरों में रोजगार के सीमित अवसर भी युवाओं की प्रमुख समस्याओं में शामिल हैं। बड़ी संख्या में युवा बेहतर रोजगार की तलाश में बड़े शहरों का रुख करते हैं।

2028 के चुनाव की तैयारी अभी से

राजनीतिक जानकारों की नजर में युवाओं को लेकर शुरू हुई यह कवायद केवल मौजूदा कार्यक्रमों तक सीमित नहीं है। 2027 के नगरीय निकाय चुनाव और उसके बाद 2028 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा और कांग्रेस दोनों ही युवा मतदाताओं के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। राहुल गांधी का छात्र संवाद हो या उज्जैन में RSS की युवा धर्म संसद, दोनों के केंद्र में युवा वर्ग दिखाई दे रहा है। वहीं भाजपा संगठन भी युवाओं के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने के लिए लगातार कार्यक्रम कर रहा है।

नारों से आगे समाधान की चुनौती

मध्य प्रदेश की राजनीति में युवाओं का महत्व लगातार बढ़ रहा है। करीब 27 प्रतिशत युवा वोटरों का यह वर्ग चुनावी नतीजों पर असर डाल सकता है। ऐसे में आने वाले समय में राजनीतिक दल युवाओं के रोजगार, शिक्षा, भर्ती और करियर से जुड़े मुद्दों को किस तरह अपने एजेंडे में शामिल करते हैं, यह अहम होगा। फिलहाल राहुल गांधी, मोहन भागवत और नितिन नबीन के एक ही सप्ताह में प्रस्तावित दौरों ने यह संकेत जरूर दे दिया है कि मध्य प्रदेश में 2028 के चुनावी रण की तैयारी शुरू हो चुकी है और इस रण के केंद्र में युवा मतदाता रहने वाले हैं।