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नई दिल्ली। विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को संयुक्त संसदीय समिति (JPC) के पास भेजे जाने के बाद गुरुवार को 31 सदस्यीय समिति का गठन कर दिया गया। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा गठित इस समिति में लोकसभा के 21 और राज्यसभा के 10 सदस्य शामिल हैं। बीजेपी सांसद डॉ. संजय जायसवाल को समिति का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है।

समिति में बीजेपी के 14 सदस्य

31 सदस्यीय JPC में बीजेपी के 14 सदस्य शामिल हैं, जबकि कांग्रेस के पांच सांसदों को जगह दी गई है। इसके अलावा जेडीयू, टीएमसी और डीएमके के दो-दो सदस्य समिति में शामिल हैं। वहीं समाजवादी पार्टी, इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग, शिवसेना, एनसीपी (एसपी), एनसीपी और टीडीपी से एक-एक सदस्य को समिति में शामिल किया गया है।

लोकसभा से ये सांसद समिति में शामिल

लोकसभा के सदस्यों में भर्तृहरि महताब, तेजस्वी सूर्या, निशिकांत दुबे, सुप्रिया सुले, ए. राजा और कल्याण बनर्जी समेत अन्य सांसद शामिल हैं। राज्यसभा से सी. सदानंदन मास्टर, हर्षवर्धन श्रृंगला, उज्ज्वल देव राव निकम, अलका गुर्जर, सत पाल शर्मा, प्रफुल पटेल, संजय कुमार झा, क्रिस्टोफर मणिकम, मेनका गुरुस्वामी और पी. विल्सन को समिति में जगह मिली है।

शीतकालीन सत्र में रिपोर्ट पेश करेगी JPC

संयुक्त संसदीय समिति को संसद के शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक लोकसभा में अपनी रिपोर्ट पेश करने के लिए कहा गया है। समिति विधेयक के प्रावधानों पर विचार करेगी और विभिन्न पक्षों की राय लेने के बाद अपनी रिपोर्ट संसद के सामने रखेगी।

विपक्ष ने विधेयक का किया था विरोध

FCRA संशोधन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधा था। 12 अगस्त को संसद के दोनों सदनों ने विधेयक को संयुक्त संसदीय समिति के पास भेजने के प्रस्ताव पारित किए थे। विपक्ष का आरोप था कि प्रस्तावित कानून अल्पसंख्यकों और गैर सरकारी संगठनों को निशाना बनाने वाला है। विपक्षी दलों ने विधेयक को पूरी तरह वापस लेने की मांग भी की थी।

सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज किया

सरकार ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि विधेयक में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव करता हो। सरकार ने विपक्ष से ऐसा कोई प्रावधान बताने की चुनौती भी दी थी।

FCRA विधेयक में क्या है प्रस्ताव?

25 मार्च को लोकसभा में पेश किए गए विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 में गैर सरकारी संगठनों और विदेशी चंदे की निगरानी को और मजबूत करने का प्रस्ताव है। सरकार का उद्देश्य विदेशी अंशदान के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना बताया गया है।

विधेयक को लेकर पूर्वोत्तर में भी विरोध

विधेयक के कुछ प्रस्तावित प्रावधानों को लेकर पूर्वोत्तर के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन भी हुए थे। नागालैंड के मुख्यमंत्री नेफिउ रियो और मिजोरम के मुख्यमंत्री लालदुहोमा ने केंद्र सरकार से विधेयक को संसदीय समिति के पास भेजने का आग्रह किया था। वहीं मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने भी विधेयक के कुछ प्रावधानों को लेकर चिंता जताई थी।

अब JPC करेगी विधेयक की समीक्षा

31 सदस्यीय समिति के गठन के बाद अब FCRA संशोधन विधेयक की विस्तृत समीक्षा JPC के स्तर पर होगी। समिति विधेयक के प्रावधानों, विपक्ष की आपत्तियों और विभिन्न हितधारकों की चिंताओं पर विचार कर अपनी रिपोर्ट संसद में पेश करेगी। इसके बाद विधेयक को लेकर आगे की संसदीय प्रक्रिया तय होगी।