भोपाल। मध्य प्रदेश के स्कूलों, छात्रावासों, ग्राम पंचायतों, अस्पतालों और अन्य सरकारी विभागों में काम कर रहे अस्थायी, अंशकालीन और आउटसोर्स कर्मचारी न्यूनतम वेतन और स्थायीकरण की मांग को लेकर 7 सितंबर को भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे। कर्मचारी संगठन भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को वर्ष 2003 में किए गए वादे की याद दिलाएगा। संगठन ने मांग पूरी नहीं होने पर पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने धरना-प्रदर्शन और आगे अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी दी है।

2003 के वादे को लेकर भाजपा से जवाब मांगेंगे कर्मचारी

अस्थायी, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा ने भाजपा संगठन को भेजे पत्र में कहा है कि वर्ष 2003 में अस्थायी कर्मचारियों को नियमित कर शासकीय सेवक का दर्जा देने का वादा किया गया था। संगठन का आरोप है कि इस वादे को 23 साल बीतने के बाद भी पूरा नहीं किया गया है। मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष वासुदेव शर्मा, कार्यवाहक अध्यक्ष डॉ. अमित सिंह और अंशकालीन कर्मचारी अध्यक्ष उमाशंकर पाठक सहित अन्य पदाधिकारियों ने भाजपा संगठन से इस मुद्दे पर ठोस पहल की मांग की है।

उमा भारती ने किया था कर्मचारियों के समर्थन में आंदोलन

कर्मचारी संगठन के मुताबिक 2003 का विधानसभा चुनाव अस्थायी कर्मचारियों के मुद्दे को लेकर भी महत्वपूर्ण रहा था। उस समय तत्कालीन भाजपा नेता उमा भारती ने कर्मचारियों की मांगों के समर्थन में वल्लभ भवन के सामने अनिश्चितकालीन धरना दिया था। संगठन का कहना है कि उस दौरान प्रदेशभर में यात्राएं कर अस्थायी कर्मचारियों को नियमित करने और उन्हें शासकीय सेवक का दर्जा देने का भरोसा दिया गया था।

स्कूल से अस्पताल तक संभाल रहे कई जिम्मेदारियां

मोर्चा का कहना है कि अंशकालीन कर्मचारी, मस्टर श्रमिक और दैनिक वेतनभोगी लंबे समय से सरकारी व्यवस्थाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। स्कूलों और छात्रावासों में सफाई, भोजन बनाने और भृत्य के काम से लेकर पंचायतों में चौकीदारी और नल-जल व्यवस्था जैसे कार्य इन कर्मचारियों से कराए जा रहे हैं। इसके अलावा अस्पतालों, नगरीय निकायों और अन्य सरकारी संस्थानों में भी सफाई, टैक्स वसूली और विभिन्न सेवाओं में अस्थायी कर्मचारी काम कर रहे हैं।

23 साल बाद भी वेतन में मामूली बढ़ोतरी का दावा

कर्मचारी नेता वासुदेव शर्मा का कहना है कि वर्ष 2003 में जिन अंशकालीन कर्मचारियों को करीब 3 हजार रुपये वेतन मिलता था, उनमें से कई को अब भी केवल 4 से 5 हजार रुपये ही मिल रहे हैं। इसी तरह पंचायतों के चौकीदार और नल-जल कर्मचारियों को उस समय करीब 2 हजार रुपये मिलते थे, जबकि वर्तमान में भी कई कर्मचारियों का वेतन 2 से 3 हजार रुपये के आसपास है। संगठन का कहना है कि महंगाई के मौजूदा दौर में इतनी कम आय में परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है। मोर्चा अब सरकार द्वारा निर्धारित 12,425 रुपये न्यूनतम वेतन देने की मांग कर रहा है।

शिवराज सरकार की वेतन दोगुना करने की घोषणा का भी उठाया मुद्दा

कर्मचारी संगठन ने वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा अस्थायी कर्मचारियों का वेतन दोगुना करने की घोषणा का भी मुद्दा उठाया है। संगठन का आरोप है कि इस घोषणा को भी पूरी तरह लागू नहीं किया गया।

7 और 8 सितंबर को अलग-अलग प्रदर्शन

मोर्चा के मुताबिक 7 सितंबर को स्कूलों, छात्रावासों और विभिन्न विभागों में कार्यरत अंशकालीन कर्मचारी भाजपा प्रदेश कार्यालय पहुंचेंगे। वहीं ग्राम पंचायतों के चौकीदार, नल-जल चालक और अन्य कर्मचारी 8 सितंबर को अपनी मांगों को संगठन के सामने रखेंगे।

कर्मचारी नेताओं ने सरकार के 1.62 लाख रुपये प्रति व्यक्ति वार्षिक आय के दावे पर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि जब बड़ी संख्या में कर्मचारी महज 2 से 5 हजार रुपये महीने की आय पर काम कर रहे हैं, तो उनकी आर्थिक स्थिति और जीवन-यापन की वास्तविकता पर भी सरकार को ध्यान देना चाहिए।

मांग पूरी नहीं हुई तो अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

अस्थायी, आउटसोर्स कर्मचारी मोर्चा ने चेतावनी दी है कि न्यूनतम वेतन और स्थायीकरण को लेकर यदि सरकार की ओर से ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा। संगठन ने भाजपा कार्यालय के सामने पं. दीनदयाल उपाध्याय की प्रतिमा के सामने धरना-प्रदर्शन और जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन धरना-अनशन शुरू करने की चेतावनी दी है।