जबलपुर। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को मध्यप्रदेश के जबलपुर में आयोजित समारोह में भारत के रक्षा क्षेत्र में बढ़ती आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में देश का घरेलू रक्षा उत्पादन करीब चार गुना बढ़ा है। वर्ष 2014 में जहां घरेलू रक्षा उत्पादन लगभग 46 हजार करोड़ रुपये था, वहीं अब यह बढ़कर करीब 1.80 लाख करोड़ रुपये हो गया है।
1 हजार करोड़ से बढ़कर 39 हजार करोड़ हुआ डिफेंस एक्सपोर्ट
राजनाथ सिंह ने कहा कि भारत के रक्षा निर्यात में भी बड़ी वृद्धि हुई है। वर्ष 2014 में करीब 1 हजार करोड़ रुपये का डिफेंस एक्सपोर्ट होता था, जो अब बढ़कर लगभग 39 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। रक्षा मंत्री ने बताया कि सरकार ने वित्तीय वर्ष 2028-29 तक रक्षा निर्यात को 50 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि भारत का रक्षा क्षेत्र अब पूर्ण आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है।
जबलपुर में बनेगी T-72 और T-90 टैंकों की मरम्मत सुविधा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने व्हीकल फैक्टरी जबलपुर में T-72 और T-90 बैटल टैंकों की मरम्मत और रखरखाव के लिए 472 करोड़ रुपये की लागत वाली नई सुविधा की आधारशिला रखी। उन्होंने कहा कि यह परियोजना आत्मनिर्भर भारत के रक्षा औद्योगिक तंत्र को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नई सुविधा में हर साल करीब 80 T-72 और T-90 टैंकों की मरम्मत की जाएगी।
सेना को हर साल 230 टैंकों की मरम्मत की जरूरत
राजनाथ सिंह के मुताबिक भारतीय सेना को हर साल करीब 230 टैंकों की मरम्मत की जरूरत होती है। फिलहाल चेन्नई के अवाडी स्थित हेवी व्हीकल्स फैक्टरी में सालाना लगभग 150 टैंकों की मरम्मत की जाती है। जबलपुर में बनने वाली नई सुविधा से बाकी क्षमता की कमी को पूरा करने में मदद मिलेगी।
स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे
रक्षा मंत्री ने कहा कि यह परियोजना सिर्फ रक्षा क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि परियोजना तय समयसीमा में और उच्च गुणवत्ता मानकों के अनुरूप पूरी की जाएगी।
राजनाथ सिंह ने कहा कि आने वाले वर्षों में भारत रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में एक मजबूत देश के रूप में उभरेगा। उन्होंने जबलपुर की नई टैंक मरम्मत परियोजना को देश के आत्मनिर्भर औद्योगिक इकोसिस्टम की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
