इंदौर: इंदौर पुलिस अब कानून-व्यवस्था और अपराधों की जांच को और मजबूत बनाने के लिए तकनीक का दायरा बढ़ा रही है। पुलिस मुख्यालय से मिले आधुनिक उपकरणों का अलग-अलग पुलिस यूनिट्स में वितरण किया गया है। इनमें फिंगरप्रिंट कंपरेटर, डेसिबल मीटर, बॉडी-वॉर्न कैमरा, वेबकैम और QR कोड जनरेटर समेत कई तकनीकी संसाधन शामिल हैं।
फिंगरप्रिंट की जांच होगी आसान
आधुनिक उपकरणों में फिंगरप्रिंट कंपरेटर को अहम माना जा रहा है। इसकी मदद से घटनास्थल से मिले फिंगरप्रिंट यानी क्वेश्चन प्रिंट की दूसरे फिंगरप्रिंट से तुलना की जा सकेगी। इससे यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि घटनास्थल से मिला निशान किसी संदिग्ध व्यक्ति के फिंगरप्रिंट से मेल खाता है या नहीं। वहीं नॉन-पोरस सरफेस से फिंगरप्रिंट लेने के लिए भी पुलिस को आधुनिक उपकरण उपलब्ध कराए गए हैं।
ध्वनि प्रदूषण पर भी होगी सटीक कार्रवाई
शहर में ध्वनि प्रदूषण पर कार्रवाई के लिए पुलिस को डेसिबल मीटर दिए गए हैं। इनके जरिए मौके पर ध्वनि की तीव्रता को मापा जा सकेगा। निर्धारित सीमा से अधिक आवाज पाए जाने पर कोलाहल अधिनियम और अन्य वैधानिक प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जा सकेगी।
बॉडी-वॉर्न कैमरों से रिकॉर्ड होगी फील्ड ड्यूटी
पुलिसकर्मियों की जवाबदेही बढ़ाने और फील्ड में होने वाली कार्रवाई को रिकॉर्ड करने के लिए बॉडी-वॉर्न कैमरों का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है। ट्रैफिक समेत अलग-अलग ड्यूटी में तैनात पुलिस अधिकारी और कर्मचारी इन कैमरों का उपयोग करेंगे। इससे कार्रवाई की पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
BNSS से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी तकनीक का इस्तेमाल
पुलिस को दिए गए वेबकैम के जरिए BNSS के प्रावधानों के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाया जा सकेगा। इसके अलावा QR कोड जनरेटर समेत अन्य तकनीकी उपकरणों का इस्तेमाल भी पुलिस की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित और आधुनिक बनाने में किया जाएगा।
कुल मिलाकर, इंदौर पुलिस अपराध की जांच, ध्वनि प्रदूषण पर कार्रवाई, फील्ड ड्यूटी और कानून-व्यवस्था की निगरानी में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ा रही है। पुलिस का मानना है कि इन आधुनिक संसाधनों से जांच की गुणवत्ता बेहतर होने के साथ पुलिसिंग में पारदर्शिता और जवाबदेही भी बढ़ेगी।
