भोपाल। राजधानी भोपाल में रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की हत्या के 21 दिन बाद भी मुख्य संदिग्ध केयरटेकर वरुण कुमार पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। कई राज्यों में तलाश और 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किए जाने के बावजूद उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। अब मामले की जांच के लिए भोपाल पुलिस कमिश्नर संजय कुमार ने पांच सदस्यीय विशेष जांच टीम (SIT) गठित की है। टीम की जिम्मेदारी डीसीपी उमेश तिवारी को सौंपी गई है। SIT को हर सप्ताह जांच की प्रगति से वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराना होगा।
इससे पहले मध्य प्रदेश IAS एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव के नेतृत्व में अधिकारियों के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से मुलाकात कर हत्याकांड की निष्पक्ष और विस्तृत जांच के लिए SIT गठित करने की मांग की थी। अधिकारियों ने लूट के अलावा पुराने आर्थिक विवाद और सुपारी देकर हत्या कराए जाने की आशंका की भी जांच कराने की बात कही थी। मुख्यमंत्री ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया था। उन्होंने डीजीपी को भी मामले की निगरानी के निर्देश दिए थे।
पांच राज्यों में तलाश, 100 से अधिक लोगों से पूछताछ
हत्याकांड के बाद से पुलिस की कई टीमें वरुण कुमार की तलाश में जुटी हैं। जांच के दौरान उसके 100 से अधिक रिश्तेदारों और परिचितों से पूछताछ की जा चुकी है। भोपाल रेलवे स्टेशन के सीसीटीवी फुटेज में वह सुबह 3 बजकर 51 मिनट पर दिखाई दिया था। पुलिस ने आगरा से वृंदावन तक कई स्थानों पर उसके पोस्टर भी लगवाए हैं। उसकी पहचान के लिए गले पर बने बिच्छू जैसे टैटू की जानकारी भी सार्वजनिक की गई। इसके बावजूद 21 अक्टूबर तक उसकी गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई थी।
30 सितंबर को घर में हुई थी रिटायर्ड IAS की हत्या
रिटायर्ड IAS अधिकारी राकेश अग्रवाल की 30 सितंबर को भोपाल के रातीबड़ थाना क्षेत्र स्थित सूरज नगर में उनके घर पर गला रेतकर हत्या कर दी गई थी। वह 1982 बैच के IAS अधिकारी थे। वारदात से कुछ दिन पहले ही उनकी देखभाल के लिए पंजाब निवासी वरुण कुमार को केयरटेकर रखा गया था। हत्या के बाद वरुण के फरार होने से पुलिस का संदेह उस पर गया। घटनास्थल पर अलमारियां खुली मिली थीं और सामान गायब था। जांच में रसोई गैस का पाइप हटाए जाने की बात भी सामने आई थी। पुलिस को आशंका थी कि हत्या के बाद आग लगाकर सबूत मिटाने की कोशिश की गई थी।
मोबाइल और ATM का इस्तेमाल बंद, पुराने आर्थिक विवाद भी जांच में
पुलिस सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी जानकारी के जरिए वरुण के भागने के रास्ते का पता लगाने की कोशिश कर रही है। जांच में उसके आगरा और वृंदावन की ओर जाने की जानकारी सामने आई थी। 20 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, वह मोबाइल फोन और एटीएम का इस्तेमाल नहीं कर रहा था, जिससे उसकी लोकेशन का पता लगाने में परेशानी हो रही थी।
वहीं, राकेश अग्रवाल से जुड़े पुराने आर्थिक विवाद भी जांच के दायरे में हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि हत्या के पीछे केवल लूट की वजह थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी था। अब SIT इस पूरे मामले की जांच कर वरिष्ठ अधिकारियों को नियमित रूप से प्रगति रिपोर्ट सौंपेगी।
