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क्रिकेटर मोहम्मद शमी को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, हसीन जहां की ट्रांसफर याचिका पर मांगा जवाब

Supreme Court Notice to Mohammed Shami: भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नोटिस जारी किया है.

Supreme Court Notice to Mohammed Shami: भारतीय क्रिकेटर मोहम्मद शमी को सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को नोटिस जारी किया है. ये नोटिस शमी की पत्नी हसीन जहां की उन याचिकाओं को लेकर जारी किया गया है जिनमें उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम व दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत दायर मामलों को कोलकाता से दिल्ली ट्रांसफर करने की मांग की है.

हसीन जहां ने अपने परिवार की निकटता और बेटी की शिक्षा का हवाला देते हुए घरेलू हिंसा और गुजाराभत्ता से जुड़े मामले को कोलकाता से दिल्ली ट्रांसफर किए जाने की मांग की है. जस्टिस मनोज मिश्रा और मनमोहन की बेंच ने शमी को नोटिस जारी किया.

हसीन जहां ने याचिका में कही ये बात

हसीन जहां ने याचिका में कहा है कि वह अपनी बेटी की अच्छी शिक्षा के लिए दिल्ली शिफ्ट हो गई हैं. इस वजह से वह पश्चिम बंगाल में होने वाली अदालती सुनवाई में शामिल नहीं हो पाएंगी. उनकी याचिका में कहा गया है कि इनकम का कोई अलग सोर्स न होने के कारण वह अपनी बेटी की रोजाना की देखभाल, परवरिश और भलाई के लिए जिम्मेदार हैं.

‘शमी कई देशों में ट्रैवल करते हैं…’

याचिका में आगे कहा गया कि ऐसे हालात में याचिकाकर्ता को पश्चिम बंगाल में केस लड़ने के लिए मजबूर करना, जो दिल्ली से 1500 km दूर है याचिकाकर्ता और नाबालिग बेटी के लिए बहुत बुरा होगा और मुश्किलें खड़ी करेगा. उन्होंने यह भी कहा कि शमी कई देशों में ट्रैवल करते हैं और इसलिए उनके पास दिल्ली में केस लड़ने के लिए काफी रिसोर्स और तरीके हैं. उन्होंने आगे कहा कि उनका परिवार उत्तर प्रदेश में रहता है, जो कोलकाता के मुकाबले दिल्ली के ज्यादा पास है.

17 जुलाई 2015 को बेटी का जन्म

हसीन जहां ने बताया कि उनकी शादी 7 अप्रैल 2014 को इस्लामी रीति-रिवाजों के अनुसार मोहम्मद शमी से हुई थी और 17 जुलाई 2015 को उनकी एक बेटी का जन्म हुआ. साल 2018 में उन्होंने घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 12 के तहत कार्यवाही शुरू की, जिसमें आरोप लगाया कि विवाह के बाद उन्हें और उनकी नाबालिग बेटी को शमी और उनके परिवार द्वारा शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना दी गई. इसी क्रम में उन्होंने शिकायत दर्ज कराई. जादवपुर थाने में आईपीसी की विभिन्न धाराओं-498A, 328, 307, 376, 325 और 34-के तहत मामला दर्ज हुआ.

सुप्रीम कोर्ट पहुंचा मामला

इसके अलावा उन्होंने भरण-पोषण के लिए CrPC की धारा 125 के तहत भी याचिका दायर की. अगस्त 2019 में अलीपुर के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने शमी और उनके परिजनों के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था, जिसे बाद में सत्र न्यायालय ने स्थगित कर दिया और यह स्थगन चार साल तक जारी रहा. हाई कोर्ट द्वारा उनकी चुनौती खारिज किए जाने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा.

10 लाख प्रतिमाह की मांग

साल 2023 में सुप्रीम कोर्ट ने सत्र न्यायालय को वारंट से संबंधित कार्यवाही एक महीने के भीतर निपटाने का निर्देश दिया था. पिछले साल कलकत्ता हाई कोर्ट ने शमी को पत्नी और बेटी के लिए प्रति माह 4 लाख अंतरिम भरण-पोषण देने का आदेश दिया था, जिसे हसीन जहां ने अपर्याप्त बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में 10 लाख प्रतिमाह की मांग के साथ चुनौती दी.

हसीन जहां ने कहा कि वह अब अपनी बेटी की समग्र परवरिश और विकास के लिए दिल्ली में रह रही हैं, इसलिए मामलों को दिल्ली स्थानांतरित किया जाए. उन्होंने यह भी बताया कि शमी का परिवार उत्तर प्रदेश के अमरोहा में रहता है और शमी स्वयं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्रा करते रहते हैं, इसलिए दिल्ली में मुकदमा चलने से दोनों पक्षों को सुविधा होगी. याचिका में यह भी कहा गया है कि हसीन जहां के पास कोई स्वतंत्र आय नहीं है और वह अकेले अपनी बेटी की देखभाल कर रही हैं, ऐसे में पश्चिम बंगाल में मुकदमा लड़ना उनके लिए अत्यंत कठिन और कष्टकारी होगा.

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