खत्म होने की कगार पर लाल आतंक! विकास नागपुरे समेत 11 हार्डकोर नक्सलियों ने किया सरेंडर

गढ़चिरौली: नक्सल आंदोलन को पिछले कुछ महीनों में मिले सबसे बड़े झटकों में से एक और झटका लगा है। सीपीआई (माओवादी) के स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य अनंत उर्फ विकास नागपुरे ने अपने 11 साथियों के साथ गोंदिया पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। यह सरेंडर महाराष्ट्र-छत्तीसगढ़ बॉर्डर इलाके में चल रहे सुरक्षा अभियानों के लिए बड़ी कामयाबी माना जा रहा है। सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर कुल 89 लाख रुपये का इनाम घोषित था। पुलिस के मुताबिक यह ग्रुप कई जिलों में सक्रिय था और बड़े-बड़े हिंसक वारदातों, भर्ती अभियान और उगाही के नेटवर्क में शामिल रहा था।
किन नक्सलियों ने किया सरेंडर?
आत्मसमर्पण के दौरान नक्सलियों के पास से भारी मात्रा में हथियार और नक्सली सामग्री भी बरामद हुई है। जिन 11 नक्सलियों ने सरेंडर किया है, उनके नाम हैं:
- स्पेशल जोनल कमेटी सदस्य अनंत उर्फ विकास नागपुरे
- DVCM कमांडर नागासु गोलू वड्डे
- रानो पोरेती
- संतु पोरेती
- संगीता पंधारे
- प्रताप बंटुला
- अनुजा कारा
- पूजा मुडियम
- दिनेश सोत्ती
- शीला मड़ावी
- अर्जुन डोडी
पुलिस का कहना है कि टॉप नक्सली लीडर हिड़मा के मारे जाने के बाद संगठन में पैदा हुए नेतृत्व के खालीपन के बाद यह पहला बड़ा सामूहिक सरेंडर है। माना जा रहा है कि इनका सरेंडर गढ़चिरौली और आसपास के इलाकों में नक्सल गतिविधियों पर लगाम कसने की दिशा में एक अहम कदम है। सरेंडर करने वाले सभी नक्सलियों को महाराष्ट्र सरकार की पुनर्वास नीति के तहत प्रोसेस किया जाएगा।
कैसे संभव हुआ ये सरेंडर?
गढ़चिरौली रेंज के DIG अंकित गोयल ने बताया, ‘लगभग 7-8 दिन पहले माओवादी के MMC जोन (मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और छत्तीसगढ़) के प्रवक्ता ने सरेंडर करने की इच्छा जाहिर की थी। उन्होंने तीनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों को दो चिट्ठियां भी लिखी थीं। उनकी इस इच्छा को ध्यान में रखते हुए हमने उनसे संपर्क साधा। इसके बाद वे अपने 10 साथियों सहित सरेंडर करने पहुंच गए। इन लोगों ने 7 हथियार भी जमा कराए। सभी पर महाराष्ट्र सरकार ने कुल 89 लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। ये सभी सीपीआई (माओवादी) के सदस्य हैं।’ DIG अंकित गोयल ने आगे कहा कि यह घटना समन्वित पुलिसिंग और नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने के लिए चलाए जा रहे आउटरीच प्रोग्राम की बढ़ती कामयाबी को दिखाती है।



