छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू, पेश हो सकता है धर्मांतरण संशोधन-विधेयक, 9 राज्यों की स्टडी से बना ड्राफ्ट
Chhattisgarh Budget Session 2026: छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू हो रहा है। 20 मार्च तक चलने वाले सत्र में कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं।

Chhattisgarh Assembly Budget Session 2026: रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू हो रहा है। 20 मार्च तक चलने वाले सत्र में कुल 15 बैठकें प्रस्तावित हैं। इस सत्र में एक हजार से अधिक प्रश्न लगाए गए हैं। 12 से ज्यादा विधेयक पेश किए जाने की तैयारी है। इनमें धर्मांतरण संशोधन विधेयक भी सदन में पेश होने की संभावना जताई जा रही है।
राजनीतिक सरगर्मी के बीच दोनों प्रमुख दलों ने अपनी-अपनी रणनीति बनानी शुरू कर दी है। भारतीय जनता पार्टी ने 23 फरवरी को विधायक दल की बैठक बुलाई है, जबकि नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत उसी दिन राजीव भवन में कांग्रेस विधायक दल के साथ बैठक करेंगे।
अब पढ़िए धर्मांतरण संशोधन विधेयक कैसा होगा, बनाने कितनी मीटिंग हुई
धर्मांतरण संशोधन विधेयक निर्माण कमेटी के सदस्यों के अनुसार, छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण को लेकर विवाद न बढ़े। इसलिए गृहमंत्री के नेतृत्व में नया ड्राफ्ट तैयार किया गया है।
इस ड्राफ्ट के अनुसार, अब किसी एक धर्म से दूसरे धर्म में जाना आसान नहीं होगा। धर्म परिवर्तन केवल पूरी प्रक्रिया और नियम कानून का पालन करने के बाद ही किया जा सकेगा। छत्तीसगढ़ सरकार धार्मिक स्वतंत्रता कानून भी बनाने जा रही है।
नियमों का उल्लंघन करने या जबरन धर्म परिवर्तन कराने पर जेल के साथ कड़ी सजा का प्रावधान किया जाएगा। इस ड्राफ्ट को तैयार करने के लिए गृहमंत्री विजय शर्मा ने 52 बैठकों में चर्चा कर मसौदा तैयार करवाया है।
अब जानिए छत्तीसगढ़ में क्यों है कानून की जरूरत ?
छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में खासकर बस्तर, जशपुर, रायगढ़ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर आदिवासियों को ईसाई धर्म में लिया जा रहा है। यह विवाद का विषय बना हुआ है। बस्तर के नारायणपुर क्षेत्र में तो यह गुटीय संघर्ष में तब्दील हो चुका है।
अभी धर्मांतरण की प्रक्रिया को वैधानिक मान्यता देने वाला कोई नियम नहीं
छत्तीसगढ़ में वर्तमान में धर्मांतरण की प्रक्रिया को वैधानिक मान्यता देने वाला कोई स्पष्ट नियम नहीं है। अक्सर देखा जाता है कि, लोग किसी अन्य धर्म के अनुयायी की बातों या प्रभाव में आकर उस धर्म को अपनाते हैं। उसकी पूजा-पद्धतियों को मानकर खुद को उस धर्म का अनुयायी घोषित कर देते हैं।
अगर कोई व्यक्ति इस प्रस्तावित नियम के बाहर जाकर धर्म परिवर्तन करता है, तो उसे वैध नहीं माना जाएगा। साथ ही किसी पर दबाव बनाकर या प्रलोभन देकर धर्म परिवर्तन कराया जाता है, तो उस व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल, गृह विभाग अन्य राज्यों के बनाए गए ऐसे कानूनों का अध्ययन कर रहा है। जिससे छत्तीसगढ़ में भी एक स्पष्ट और मजबूत नियम तैयार किया जा सके।
आदिवासी और धर्म परिवर्तन करने वाले आदिवासियों के बीच कई बार गंभीर विवाद हो चुका है। कानून व्यवस्था बिगड़ चुकी है। इस कारण छत्तीसगढ़ सरकार ने ऐसे विवाद को टालने और धर्मांतरण पर एक कानून बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।
क्या है धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम ?
इस अधिनियम के तहत हर व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म का पालन करने का अधिकार है। इस स्वतंत्रता को लोकतंत्र का प्रतीक माना जाता है। धर्म की स्वतंत्रता के अधिकार का अर्थ है कि हर व्यक्ति को अपनी पसंद के धर्म का अभ्यास करने और उसका पालन करने का अधिकार है।
छत्तीसगढ़ में लगभग 900 चर्च
छत्तीसगढ़ में लगभग 727 चर्च हैं। हालांकि ग्रामीण अंचलों में छोटे-छोटे चर्चों को मिलाकर इनकी संख्या 900 के पार है। इनमें सबसे पहला चर्च विश्रामपुर में है, जो सिटी ऑफ रेस्ट के नाम से जाना जाता है। जिसे 1868 में बनाया गया था।
वहीं, जशपुर के कुनकुरी में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा रोमन कैथोलिक कैथेड्रल चर्च है। जिसे 1979 में स्थापित किया गया था। यहां प्रार्थना के लिए कई राज्यों से मसीह समाज के लोग आते हैं। साथ ही अलग-अलग समय धर्म प्रचार के लिए कई कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं।




