
CG Raipur News: रायपुर। राजधानी रायपुर के जिला उपभोक्ता आयोग की अतिरिक्त पीठ ने सेवा में लापरवाही बरतने के मामले में यूरेका फोर्ब्स लिमिटेड पर 50 हजार रुपए का जुर्माना लगाया है। आयोग ने कंपनी को परिवादी को मुआवजा देने और वाटर फिल्टर की निशुल्क मरम्मत या नया फिल्टर उपलब्ध कराने का आदेश दिया है। मामले की सुनवाई आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुण्डू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीस की पीठ ने की।
एएमसी होने के बावजूद नहीं मिली सेवा
देवेंद्र नगर निवासी परिवादी सुरजीत सिंह छाबड़ा ने बताया कि उन्होंने घरेलू उपयोग के लिए यूरेका फोर्ब्स का ‘डॉ. एक्वागार्ड क्लासिक प्लस’ वाटर फिल्टर खरीदा था। मशीन के रखरखाव के लिए उन्होंने कंपनी से 5,941 रुपए में दो साल का एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (AMC) भी लिया था, जिसकी वैधता 11 सितंबर 2026 तक थी।
शिकायत के अनुसार 6 सितंबर 2025 को वाटर फिल्टर में खराबी आ गई। इसकी सूचना कंपनी को दी गई, जिसके बाद टेक्नीशियन मौके पर पहुंचा और जांच में पंप खराब पाया गया। टेक्नीशियन ने एक-दो दिन में पंप बदलने का आश्वासन दिया, लेकिन कई दिनों तक न तो पंप बदला गया और न ही मशीन ठीक की गई।
बोतलबंद पानी खरीदने को हुए मजबूर
पंप बदलने में देरी के कारण परिवादी को साफ पेयजल के लिए परेशानी झेलनी पड़ी। मजबूरी में उन्हें बाजार से बोतलबंद पानी खरीदकर उपयोग करना पड़ा। एएमसी होने के बावजूद सेवा नहीं मिलने पर उन्होंने उपभोक्ता फोरम में परिवाद दायर किया।
आयोग ने सुनाया एकतरफा फैसला
फोरम की ओर से नोटिस जारी होने के बाद कंपनी ने एक बार उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन बाद की सुनवाई में कोई जवाब या तर्क प्रस्तुत नहीं किया। इसके चलते आयोग ने एकतरफा सुनवाई करते हुए फैसला सुनाया।
आयोग ने आदेश दिया कि यूरेका फोर्ब्स 45 दिनों के भीतर वाटर फिल्टर की निशुल्क मरम्मत करे। यदि मरम्मत संभव नहीं हो तो परिवादी को नया वाटर फिल्टर उपलब्ध कराया जाए। साथ ही मानसिक कष्ट के लिए कंपनी को 50 हजार रुपए मुआवजा देने का भी निर्देश दिया गया है।
स्वच्छ पेयजल को बताया मूलभूत आवश्यकता
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि स्वच्छ पेयजल जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। वैध एएमसी होने के बावजूद उपभोक्ता को निशुल्क मरम्मत सेवा उपलब्ध नहीं कराना स्पष्ट रूप से सेवा में कमी की श्रेणी में आता है।




