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ऑस्ट्रेलिया संसद में गूंजा सनातन संदेश: धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बोले—‘मन में शांति होगी तभी विश्व में शांति’

Canberra Latest News: कैनबरा | बागेश्वर धाम सरकार धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री का ऑस्ट्रेलिया की संसद में ऐतिहासिक संबोधन हुआ। वे 8 से 15 अप्रैल तक ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर हैं। आज कैनबरा स्थित संसद भवन से उन्होंने पूरी दुनिया को शांति का संदेश दिया। बाबा बागेश्वर का यह ऑस्ट्रेलिया दौरा खास माना जा रहा है क्योंकि यह पहली बार किसी भारतीय संत ने ऑस्ट्रेलिया की संसद में आध्यात्मिक प्रवचन दिया। अपने प्रवचन में उन्होंने विश्व शांति के लिए मन के अंदर शाति स्थापित करने की बात कही।

जब मन में शांति होगी तभी विश्व शांति स्थापित होगी
इस अवसर पर बाबा बागेश्वर ने कहा कि पहली बार ऑस्ट्रेलिया की संसद में सनातन संस्कृति का कार्यक्रम आयोजित हो रहा है। यहां के मूल निवासी, प्रशासन के अधिकारी और दुनिया के 150 करोड़ सनातनियों की ओर से धन्यवाद कि आप विश्व शांति की चर्चा के लिए इकट्ठा हुए हैं। उन्होंने कहा कि विश्व में शांति तभी आ सकती है जब मन में शांति स्थापित होगी।

भगवान करे सीजफायर बना रहे
बाबा बागेश्वर ने ईरान-अमेरिका युद्ध का उल्लेख करते हुए कहा कि मैं रास्ते में था तो पता चला कि मिडिल ईस्ट में जो युद्ध चल रहा था वहां सीजफायर हो गया। भगवान करे सीजफायर बना रहे। ऑस्ट्रेलिया की संसद से बैठकर हम इतना कह सकते हैं विवाद कोई रास्ता नहीं, संवाद रास्ता है। उन्होंने कहा कि विनाश करना है तो युद्ध को चुनो और विकास के लिए बुद्ध को चुनो। उन्होंने प्रेम के रास्ते चलने का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि जिसने बाहर ढूंढा उसे शांति नहीं मिली। जिसने अपने अंदर खोजना शुरू किया उसने शांति को प्राप्त कर लिया। उन्होंने कहा कि जब हमारे अंदर शांति होगी तभी विश्व में शांति होगी।

जब तक कुछ पाने की इच्छा है तब तक आप अशांत हैं
बाबा बागेश्वर ने कहा कि अंदर के तत्व को जान लेना ही शांति है। आप तब तक अशांत हैं जब तक कुछ पाने की इच्छा है। बड़े-बड़े राजा, नौकर चाकर रखने वाले लोग आशांत रहते हैं लेकिन साधु-संतों फकीरों को देखो, वे कितने शांत हैं। जब तक अतृप्त रहोगे अशांत रहोगे और जब तृप्त हो जाओगे तब शांत हो जाओगे।

उन्होंने कहा कि इच्छा और अनिच्छा दो चीजें हैं। जो सोचा वह इच्छा है, जो सोचा और पूरा न हो वह अनिच्छा है। संतुष्टि हो जाएगी तो शांति स्थापित हो जाएगी। शांति दो तरह की होती है। एक बाहर की शांति और एक अंदर शांति होती है। शांति आपके अंदर की चीज है। बाजार में भी आप शांत रह सकते हैं। तूफान में भी आप शांत रह सकते हैं। अंदर की शांति स्थापित होने के बाद बाहर की अशांति आपको डिगा नहीं सकती।

भारत ने पूरी दुनिया को परिवार की दृष्टि से देखा
उन्होंने भारत की संस्कृति और सभ्यता का उल्लेख करते हुए कहा कि हम बहुत गौरवशाली हैं और उस सनातन परंपरा से आते हैं जहां शांति से ही शुरुआत होती है। उन्होंने कहा कि पूरी दुनिया ने सभी देशों को व्यापार की दृष्टि से देखा लेकिन भारत ने पूरी दुनिया को परिवार की दृष्टि से देखा। उन्होंने कहा कि स्त्रियों को दुनिया ने भोग्या की दृष्टि से देखा लेकिन हमने पूज्या की दृष्टि से देखा।

संवाद ही एकमात्र रास्ता
बाबा बागेश्वर ने ईरान और अमेरिका को शांति का संदेश देते हुए कहा कि सबसे बड़ी लड़ाई महाभारत हमारे भारत देश में लड़ी गई और जिस जमीन पर महाभारत की लड़ाई लड़ी गई वह जमीन आज भी पड़ी है लेकिन जो लड़े वो सब निपट गए। इसलिए कहता हूं कि विवाद कोई रास्ता नहीं है। संवाद ही एकमात्र रास्ता है।

बता दें कि 8 से 15 अप्रैल तक ऑस्ट्रेलिया के अपने दौरे में बागेश्वर सरकार विश्व शांति, सनातन संस्कृति और मानव कल्याण का संदेश देंगे। उनके कार्यक्रमों में Perth के पर्थ कन्वेंशन सेंटर में 11 से 12 अप्रैल तक श्री हनुमान कथा का आयोजन होगा। इसके अलावा सिडनी के ओपेरा हाउस में 15 अप्रैल को एक दिवसीय सत्संग कार्यक्रम रखा गया है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है।

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