भोपाल। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से एक दिन पहले मध्यप्रदेश सरकार ने बाजार से 2500 करोड़ रुपये का नया कर्ज जुटाया है। यह राशि भारतीय रिजर्व बैंक के माध्यम से हुई सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में तीन अलग-अलग सिक्योरिटीज के जरिए जुटाई गई। RBI के नीलामी रिकॉर्ड के मुताबिक मध्यप्रदेश के लिए 700 करोड़, 900 करोड़ और 900 करोड़ रुपये की तीनों प्रतिभूतियों की राशि स्वीकार की गई।

सरकार की ओर से इन प्रतिभूतियों से जुटाई गई राशि का उद्देश्य विकास कार्यों और विभिन्न परियोजनाओं के लिए वित्त उपलब्ध कराना बताया गया है। तीनों कर्ज की अवधि 8 वर्ष से लेकर 22 वर्ष तक है।

700 करोड़ का कर्ज, 7.39 प्रतिशत ब्याज

मध्यप्रदेश सरकार ने 7.39 प्रतिशत ब्याज दर वाली 7.39% Madhya Pradesh SGS 2034 की री-इश्यू के जरिए 700 करोड़ रुपये जुटाए हैं। यह सिक्योरिटी मूल रूप से 22 जुलाई 2026 को जारी की गई थी और इसकी परिपक्वता 22 जुलाई 2034 को होगी। RBI के नीलामी आंकड़ों में इस री-इश्यू के लिए 700 करोड़ रुपये की पूरी राशि स्वीकार की गई।

900 करोड़ का कर्ज 12 साल के लिए

दूसरी सरकारी प्रतिभूति के जरिए 900 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। यह 7.58 प्रतिशत ब्याज दर वाली मध्यप्रदेश सरकारी सिक्योरिटी 2038 की री-इश्यू है। इसकी अवधि 12 वर्ष है और मूलधन की परिपक्वता 22 जुलाई 2038 को होगी। RBI के मुताबिक इस प्रतिभूति की 900 करोड़ रुपये की पूरी राशि स्वीकार की गई।

22 साल की अवधि वाला 900 करोड़ का कर्ज

तीसरी और सबसे लंबी अवधि वाली प्रतिभूति के जरिए भी 900 करोड़ रुपये जुटाए गए हैं। यह 7.66 प्रतिशत ब्याज दर वाली मध्यप्रदेश सरकारी सिक्योरिटी 2048 की री-इश्यू है। इसकी मूल प्रतिभूति 19 अगस्त 2026 को जारी हुई थी और इसका मूलधन 19 अगस्त 2048 को परिपक्व होगा। यानी इस कर्ज की अवधि करीब 22 वर्ष है। RBI के रिकॉर्ड के अनुसार इस प्रतिभूति के लिए भी 900 करोड़ रुपये की पूरी राशि स्वीकार की गई।

तीनों कर्ज मिलाकर 2500 करोड़ रुपये

इस तरह 700 करोड़, 900 करोड़ और 900 करोड़ रुपये की तीनों प्रतिभूतियों को मिलाकर मध्यप्रदेश सरकार ने कुल 2500 करोड़ रुपये जुटाए हैं। तीनों प्रतिभूतियां सरकारी सिक्योरिटीज हैं और इनकी ब्याज दरें क्रमशः 7.39 प्रतिशत, 7.58 प्रतिशत और 7.66 प्रतिशत हैं।

चालू वित्त वर्ष में कर्ज का आंकड़ा बढ़ा

उपलब्ध विवरण के अनुसार, इससे पहले 1 सितंबर को भी मध्यप्रदेश सरकार ने 3600 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। ताजा 2500 करोड़ रुपये जोड़ने के बाद चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार द्वारा लिए गए कर्ज का आंकड़ा 53,900 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। नए कर्ज के बाद राज्य सरकार पर कुल बकाया कर्ज 5 लाख 42 हजार 614 करोड़ रुपये तक पहुंचने का दावा किया गया है। हालांकि कुल ऋण के आंकड़े को प्रस्तुत करते समय संबंधित वित्तीय दस्तावेज और गणना की तारीख को ध्यान में रखना जरूरी है।

विकास योजनाओं के लिए कर्ज लेने का सरकारी तर्क

सरकार की ओर से सरकारी प्रतिभूतियों के जरिए जुटाई गई राशि का इस्तेमाल विकास कार्यों और उत्पादक योजनाओं एवं परियोजनाओं के वित्त पोषण के लिए किए जाने की बात कही गई है। हाल ही में मध्यप्रदेश कैबिनेट ने भी विकास, अधोसंरचना और जनकल्याण से जुड़े 42,490 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावों को मंजूरी दी थी। सरकारी प्रतिभूतियों को बैंकों के लिए वैधानिक तरलता अनुपात यानी SLR के तहत पात्र निवेश माना जाता है। RBI की नीलामी प्रक्रिया में मध्यप्रदेश की तीनों प्रतिभूतियों की निर्धारित राशि स्वीकार की गई है।

8 से 22 साल में होगी कर्ज की अदायगी

मध्यप्रदेश सरकार द्वारा लिए गए इस नए कर्ज की अवधि अलग-अलग रखी गई है। 700 करोड़ रुपये वाले कर्ज की अवधि 8 वर्ष, 900 करोड़ रुपये वाले दूसरे कर्ज की अवधि 12 वर्ष और तीसरे 900 करोड़ रुपये वाले कर्ज की अवधि करीब 22 वर्ष है। इस तरह सरकार को अलग-अलग प्रतिभूतियों के मूलधन का भुगतान उनकी निर्धारित परिपक्वता तारीखों पर करना होगा।