मध्य प्रदेश में खत्म होगी दो-बच्चों की शर्त: सरकारी नौकरी में बड़ी राहत, 30 हजार से ज्यादा कर्मचारियों को फायदा
MP Latest News: भोपाल से बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही सरकारी नौकरियों में लागू दो-बच्चों की शर्त को खत्म करने जा रही है।

MP Latest News: भोपाल से बड़ी प्रशासनिक खबर सामने आई है। मध्य प्रदेश सरकार जल्द ही सरकारी नौकरियों में लागू दो-बच्चों की शर्त को खत्म करने जा रही है। सामान्य प्रशासन विभाग ने इस संबंध में प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही कैबिनेट में पेश किया जाएगा।
सूत्रों के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने इस प्रस्ताव को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। कैबिनेट की मंजूरी के बाद तीसरी संतान होने पर किसी भी सरकारी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटाया जा सकेगा।
यह नियम वर्ष 2001 में दिग्विजय सिंह की सरकार के दौरान सिविल सेवा नियम, 1961 में संशोधन कर लागू किया गया था। अब बदलते सामाजिक परिप्रेक्ष्य और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए इसमें बदलाव किया जा रहा है।
क्यों बदला जा रहा नियम?
पिछले कुछ वर्षों में इस नियम की प्रासंगिकता पर सवाल उठ रहे थे। इसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता के खिलाफ माना जा रहा था। हाल ही में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भी जनसंख्या संतुलन को लेकर तीन बच्चों की आवश्यकता पर जोर दिया था, जिसके बाद इस मुद्दे पर चर्चा तेज हो गई।
किन्हें मिलेगा फायदा?
इस फैसले से करीब 30 हजार शिक्षकों समेत हजारों सरकारी कर्मचारियों को राहत मिलने की उम्मीद है, जिनके दो से अधिक बच्चे हैं। खासतौर पर स्कूल शिक्षा, उच्च शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग में लंबित हजारों मामलों का समाधान हो सकेगा।
फैसले के प्रमुख असर:
- तीसरी संतान के कारण नौकरी जाने का डर खत्म होगा।
- लंबित मामलों में कानूनी विवाद और मानसिक तनाव से राहत मिलेगी।
- नई भर्तियों में तीन बच्चों वाले उम्मीदवार भी पात्र होंगे।
- 2001 के बाद बर्खास्त कर्मचारियों के मामलों पर भी कैबिनेट फैसला ले सकती है।
- शिक्षा और स्वास्थ्य विभागों में लंबे समय से लंबित मामलों का निपटारा संभव होगा।
अन्य राज्यों में पहले ही हट चुकी है पाबंदी
मध्य प्रदेश से पहले राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी यह पाबंदी खत्म की जा चुकी है। वहीं आंध्र प्रदेश में तीसरे बच्चे पर प्रोत्साहन राशि देने की भी घोषणा की गई है।
सरकार के इस फैसले को कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे न केवल नौकरी की सुरक्षा बढ़ेगी बल्कि सामाजिक और व्यक्तिगत अधिकारों को भी मजबूती मिलेगी।




