Republic Day 2026: भारत का 77वां गणतंत्र दिवस, जानिए इस खास दिन से जुड़ी कुछ रोचक बातें

Republic Day 2026: नई दिल्ली। हम आज अपना 77वां गणतंत्र दिवस मना रहे हैं। गणतंत्र दिवस भारत की संवैधानिक यात्रा, लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। गणतंत्र दिवस हमें याद दिलाता है कि लोकतंत्र सिर्फ चुनाव या सरकार नहीं, बल्कि एक जीवंत प्रक्रिया है। यह नागरिकों को उनके मौलिक अधिकारों की याद दिलाता है। संविधान का सम्मान, विविधता में एकता, राष्ट्रीय एकता बनाए रखना और देश की प्रगति में योगदान देना..ये सभी इस दिन के मूल संदेश हैं।
26 जनवरी की तारीख का चुनाव कोई संयोग नहीं था। 26 जनवरी 1930 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने लाहौर अधिवेशन में पूर्ण स्वराज की घोषणा की थी। आजादी के बाद संविधान सभा ने 26 नवंबर 1949 को संविधान को अंगीकृत किया, लेकिन इसे लागू करने की तारीख 26 जनवरी 1950 तय की गई। इसी दिन डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने राष्ट्रपति पद की शपथ ली और 21 तोपों की सलामी के साथ भारत को गणतंत्र राष्ट्र घोषित किया गया।
भारत का 77वां गणतंत्र दिवस
इस साल गणतंत्र दिवस की थीम “वंदे मातरम् के 150 वर्ष” है। यह थीम बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित राष्ट्रीय गीत के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व को समर्पित है। ये दिन भारत के संविधान, लोकतंत्र और नागरिक अधिकारों की सामूहिक चेतना का प्रतीक है, जो हर वर्ष देश को उसकी संवैधानिक यात्रा और राष्ट्रीय एकता की याद दिलाता है। आज का दिन अपने संवैधानिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता दोहराने का दिन भी है। भारत का संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसके निर्माण में दो वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा। गणतंत्र दिवस के साथ ऐसी कई रोचक बातें जुड़ी हुई हैं। आइए कुछ ऐसे ही रोचक तथ्यों पर नज़र डालते हैं।
गणतंत्र दिवस से जुड़े रोचक तथ्य
- क्या आप जानते हैं कि हमारे संविधान की मूल प्रति पूरी तरह हस्तलिखित है। इसे प्रसिद्ध सुलेखक प्रेम बिहारी नारायण रायजादा ने हिंदी और अंग्रेज़ी दोनों भाषा में लिखा। उन्होंने इसे इटैलिक स्टाइल में हाथ से लिखा और इसके लिए कोई फीस भी नहीं ली थी।
- संविधान के प्रत्येक पृष्ठ को भारतीय संस्कृति और इतिहास से जुड़ी कलाकृतियों से सजाया गया है जिसका नेतृत्व शांति निकेतन के विख्यात कलाकार नंदलाल बोस ने किया। संविधान के निर्माण में कुल दो वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा।
- 26 जनवरी 1950 को ही कई महत्वपूर्ण राष्ट्रीय निर्णय भी लिए गए। इसी दिन वायुसेना को अपनी पहचान मिली। इस दिन भारतीय वायुसेना ने अपने नाम से ‘रॉयल’ (Royal) शब्द हटाया था, जो ब्रिटिश शासन काल से चला आ रहा था। ब्रिटिश काल से चले आ रहे ‘रॉयल इंडियन एयर फोर्स’ से ‘रॉयल’ शब्द हटाकर इसका नाम ‘इंडियन एयर फोर्स’ किया गया।
- इसी ऐतिहासिक दिन 26 जनवरी 1950 को सारनाथ स्थित अशोक स्तंभ के ‘सिंह शीर्ष’ को भारत के ‘राष्ट्रीय प्रतीक’ (National Emblem) के रूप में आधिकारिक तौर पर अपनाया गया था।
- भारत का पहला गणतंत्र दिवस समारोह वर्ष 1950 में इरविन स्टेडियम, वर्तमान मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम में आयोजित किया गया था। उस ऐतिहासिक अवसर पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो मुख्य अतिथि थे।
- शुरुआती वर्षों में गणतंत्र दिवस परेड विभिन्न स्थलों पर आयोजित होती रही। वर्ष 1955 से राजपथ..जिसे अब कर्तव्य पथ कहा जाता है वह परेड का स्थायी मार्ग बनाया गया।
- गणतंत्र दिवस समारोह 26 जनवरी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका औपचारिक समापन 29 जनवरी को होने वाले ‘बीटिंग रिट्रीट’ समारोह के साथ होता है। यह परंपरा ब्रिटिश सैन्य रिवाज से जुड़ी रही है, जिसे भारतीय सशस्त्र बलों ने भारतीय धुनों और वाद्ययंत्रों के साथ विशिष्ट राष्ट्रीय स्वरूप प्रदान किया है।



