‘मन की बात’ के 130वां एपिसोड, प्रधानमंत्री मोदी ने कहा- जेन-Z के बीच लोकप्रिय हो रही भजन क्लबिंग
Mann Ki Baat: पीएम मोदी आज 'मन की बात' के 130वें एपिसोड के जरिए लोगों से रूबरू हुए। पीएम मोदी ने कार्यक्रम में कहा कि यह साल 2026 का पहला 'मन की बात' कार्यक्रम है।

Mann Ki Baat: नई दिल्ली। पीएम मोदी आज ‘मन की बात’ के 130वें एपिसोड के जरिए लोगों से रूबरू हुए। पीएम मोदी ने कार्यक्रम में कहा कि यह साल 2026 का पहला ‘मन की बात’ कार्यक्रम है। कल हम गणतंत्र दिवस मनाएंगे। आज का दिन भी अहम है। आज हम नेशनल वोटर डे मना रहे हैं। आम तौर पर जब कोई 18 साल हो जाता है तो वह मतदाता बन जाता है। इसे जीवन का अहम पड़ाव माना जाता है, इसलिए बहुत जरूरी है कि देश में वोटर बनने का उत्सव मनाएं। जब कोई युवा पहली बार मतदाता बने तो एकजुट होकर उसका अभिनंदन करें और मिठाइयां बाटें, इससे जागरूकता बढ़ेगी। इससे यह भावना भी सशक्त होगी कि वोटर होना कितना मायने रखता है। मैं युवा साथियों से आग्रह करूंगा कि 18 साल का होने पर खुद को वोटर के रूप में रजिस्टर करें।
क्वालिटी पर दें जोर
पीएम मोदी ने कहा, “इन दिनों सोशल मीडिया पर एक ट्रेंड चल रहा है, जिसमें लोग 2016 की यादों का ताजा कर रहे हैं। दस साल पहले जनवरी 2016 में हमने भी एक जर्नी की शुरुआत की थी। हमें यह एहसास था कि ये भले छोटा हो, लेकिन ये देश के लिए अहम होगा। मैं जिस जर्नी की बात कर रहा हूं वह है स्टार्टअप इंडिया की जर्नी। इस जर्नी के हीरो हमारे युवा साथी हैं। युवाओं ने जो इनोवेशन किए, वो इतिहास में दर्ज हो रहे हैं। आज दुनिया में भारत तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप बन रहा है। आज भारत के स्टार्ट अप ऐसे काम कर रहे हैं जिसके बारे में दस साल पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। मैं अपने उन सभी युवा साथियों को सैल्यूट करता हूं जो किसी स्टार्टअप से जुड़े हैं। मैं एक आग्रह भी करना चाहता हूं कि भारत की इकॉनोमी तेजी से आगे बढ़ रही है। ऐसे में हम सब पर एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी है। ये जिम्मेदारी है क्वालिटी पर जोर देने की। इस साल हम पूरी ताकत से क्वालिटी को प्राथमिकता दें। कल से आज बेहतर क्वालिटी। इंडियन प्रोटक्ट का मतलब बन जाए टॉप क्वालिटी।”
समस्याओं का समाधाना खोजना हमारा स्वभाव
पीएम मोदी ने आगे कहा, “हमारे देश के लोग बहुत इनोवेटिव हैं। समस्याओं का समाधाना खोजना हमारे स्वभाव में है। ऐसा ही एक प्रयास यूपी के आजमगढ़ से सामने आया। यहां से होकर गुजरने वाली तमसा नदी को लोगों ने नया जीवन दिया है। अयोध्या से निकलकर गंगा में समाहित होने वाली यह नदी कभी यहां के लोगों के जनजीवन की धुरी हुआ करती थी। लेकिन प्रदूषण की वजह से इसकी अविरल धारा में रुकावट आने लगी थी। यहां के लोगों ने इसे एक नया जीवन देने का अभियान शुरू किया। नदी की सफाई की, किनारों पर पेड़ लगाए और सबके प्रयास से नदी का उद्धार हो गया। ऐसा ही एक प्रयास आंध्र प्रदेश के अनंतपुर में भी देखने को मिला। यहां काफी समय से सूखा था। यहां के कई क्षेत्रों में लंबे समय तक बारिश नहीं होती थी। इस समस्या के समाधान के लिए स्थानीय लोगों ने जलाशयों को साफ करने का संकल्प लिया। यहां अनंत निरु संकल्प प्रोजेक्ट की शुरुआत हुई। करीब 10 जलाशयों को जीवनदान मिला। अब अनंतपुर में जल संरक्षण के साथ ग्रीन कवर भी बढ़ा है। यहां का पूरा इकोसिस्टम निखर गया है। आजमगढ़ या अनंतपुर कोई भी जगह हो ये देखकर खुशी होती है कि लोग एकजुट होकर संकल्प लेते हैं। यही हमारे देश की सबसे बड़ी ताकत है।”
जेन-Z के बीच लोकप्रिय हो रही भजन क्लबिंग
पीएम मोदी ने कहा, “भजन और कीर्तन हमारी संस्कृति की ताकत रहे हैं। आज की पीढ़ी भी कुछ नए कमाल कर रही है। युवाओं ने भक्ति को अपने अनुभव और जीवनशैली में ढाल दिया है। आपने ऐसे वीडियो जरूर देखे होंगे, जिसमें युवा इकट्ठा होते हैं, संगीत होता है और माहौल किसी कंसर्ट से जरा भी कम नहीं होता है, लेकिन वहां पूरी तनमयता के साथ भजन गाया जा रहा होता है। इसे भजन क्लबिंग कहा जा रहा है। यह खासकर जेन-Z के बीच लोकप्रिय हो रहा है। ये देखकर अच्छा लगता है। भक्ति को हल्केपन में नहीं लिया जाता। मंच आधुनिक हो सकता है, लेकिन मूल भावना वही रहती है। आध्यात्म का निर्तर प्रवाह वहां अनुभव होता है। आज हमारी संस्कृति और त्योहार दुनियाभर में अपनी पहचान बना रहे हैं। मलेशिया में हमारा भारतीय समुदाय सराहनीय काम कर रहा है। मलेशिया में 500 से ज्यादा तमिल स्कूल हैं। इनमें तमिल के अलावा अन्य भाषाओं की भी पढ़ाई होती है।”
परिवार की ताकत से हर समस्या हो सकती है परास्त
उन्होंने आगे कहा, “हम भारत के किसी हिस्से में चले जाएं वहां कुछ न कुछ असाधारण दिख जाता है। इनसे पता चलता है कि हमारे समाज की असली शक्ति क्या है। गुजरात में बेचरा जी के चंदन की गांव की परंपरा अपने आप में अनूठी है। यहां के लोग अपने घरों में खाना नहीं बनाते, इसकी वजह गांव का शानदार कम्यूनिटी किचन है। इसमें एक साथ पूरे गांव का खाना बनता है और लोग एक साथ बैठकर भोजन करते हैं। बीते 15 सालों से यह परंपरा चलती आ रही है। अगर कोई बीमार है तो होम डिलिवरी की भी व्यवस्था है। ये पहल न केवल लोगों को आपस में जोड़ती है, बल्कि इससे पारिवारिक भावना को बढ़ावा मिलता है। भारत के पारिवारिक सिस्टम को इसे कौतूहल के तौर पर देखा जाता है। कुछ दिन पहले यूएई के राष्ट्रपति अल नाहयान भारत आए थे। उन्होंने बताया कि यूएई साल 2026 को ईयर ऑफ फैमिली के तौर पर मना रहा है। वाकई यह सराहनीय पहल है। जब परिवार और समाज की ताकत मिलती है तो हम बड़ी से बड़ी समस्या को परास्त कर सकते हैं।”
स्वच्छता को लेकर सजग हैं युवा
पीएम मोदी ने कहा, “मुझे ये देखकर गर्व होता है कि हमारे युवा अपने आसपास की स्वच्छता को लेकर सजग हैं। अरुणाचल प्रदेश में ऐसा ही एक मामला सामने आया। यहां ईटानगर में युवाओं का समुह उन हिस्सों की सफाई के लिए एकजुट हुआ, जहां इसकी जरूरत थी। युवाओं ने इसे अपना संकल्प बना लिया। इसके बाद कई इलाकों में ये अभियान चलाया गया। अबतक करीब 11 लाख किलो से अधिक कचरे की सफाई ये युवा कर चुके हैं। एक और उदाहरण असम के नौगांव का है। यहां कुछ लोगों ने अपनी गलियों को साफ करने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे इनके साथ और लोग जुड़ते गए। इनके साथ ऐसी टीम बन गई, जो गलियों को साफ करने में जुट गई। बेंगलुरु में कुछ प्रोफेशनल ‘सोफा वेस्ट’ को सॉल्व कर रहे हैं। चेन्नई में ऐसी ही एक टीम ने बेहतरीन काम किया है। इससे पता चलता है कि स्वच्छता से जुड़ा हर प्रयास कितना अहम है।”
पर्यावरण संरक्षण के लिए छोटे प्रयास जरूरी
आगे उन्होंने कहा, “जब पर्यावरण संरक्षण की बात होती है तो बड़ी योजनाएं और बड़े संगठन की बात आती है। कई बार बदलाव की शुरुआत साधारण तरीके से होती है। लगातार की गई छोटी कोशिशों से भी बड़े बदलाव आते हैं। पश्चिम बंगाल के कूंचबिहार के रहने वाले बैनोई दास ने ऐसा ही प्रयास किया है। उन्होंने खुद के पैसों से हजारों पेड़ लगाए हैं। अब इलाके में हरियाली काफी ज्यादा बढ़ गई है। पर्यावरण संरक्षण की यही भावना बड़े स्तर पर भी दिखाई दे रही है। इसी सोच के तहत एक पेड़ मां के नाम अभियान चलाया जा रहा है। अब तक देश में 200 करोड़ से ज्यादा पेड़ लगाए जा चुके हैं। लोग अब पर्यावरण को लेकर ज्यादा जागरूक हैं।”
मिलेट को लेकर इनोवेशन कर रहे किसान
पीएम मोदी ने आखिर में कहा, “मैं आप सभी की मिलेट के लिए सराहना करना चाहता हूं। मिलेट के प्रति लोगों का लगाव लगातार बढ़ रहा है। साल 2023 को हमने मिलेट वर्ष घोषित किया था, लेकिन आज तीन साल बाद भी इसे लेकर जो पैशन है वो उत्साहित करने वाला है। राजस्थान के रामसर में किसान मिलेट को लेकर इनोवेशन कर रहे हैं। यहां एक कंपनी में 900 से अधिक किसान जुड़े हैं। ये किसान बाजरे की खेती करते हैं। इससे लड्डू तैयार किया जाता है, जिसकी बहुत ज्यादा मांग है। कई मंदिर हैं जो अपने प्रसाद में सिर्फ मिलेट का उपयोग करते हैं। मिलेट से अन्नदाताओं की कमाई बढ़ने के साथ ही लोगों के स्वास्थ्य में सुधार का उदाहरण बनता है। सर्दियों के दिनों में हमें श्रीअन्न का सेवन जरूर करना चाहिए। फरवरी में इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट होने जा रही है। इसमें दुनिया भर से एक्सपर्ट भारत आ रहे हैं। इसमें शामिल होने वाले हर किसी का मैं हृदय से अभिनंदन करता हूं। अगले मन की बात कार्यक्रम में इस पर जरूर चर्चा करेंगे। कल के गणतंत्र दिवस के लिए आप सभी को बहुत बहुत शुभकामनाएं।”



