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इंदौर क्रिश्चियन कॉलेज की 400 करोड़ की जमीन सरकारी हुई, 137 साल पुरानी लीज शर्तों का उल्लंघन करने पर कार्रवाई

MP Indore News: इंदौर। मध्यप्रदेश के इंदौर में क्रिश्चियन कॉलेज की जमीन सरकारी घोषित कर दी गई। करीब 400 करोड़ रुपए मूल्य की इस भूमि पर लंबे समय से भूमाफिया की नजर थी, वहीं कॉलेज प्रबंधन इसके व्यावसायिक उपयोग की कोशिशें कर रहा था।

लीज शर्तों के उल्लंघन को आधार बनाते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा ने शुक्रवार को यह कार्रवाई की। साथ ही जूनी इंदौर तहसीलदार को तीन दिन में जमीन का कब्जा लेने के आदेश दिए हैं। कलेक्टर के आदेश के अनुसार, कब्जा लिए जाने के बाद इस जमीन का उपयोग शासन हित में किया जाएगा।

हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी नहीं मिली राहत

कॉलेज प्रबंधन ने कलेक्टर की ओर से जारी कारण बताओ नोटिस को पहले हाई कोर्ट में चुनौती दी थी, लेकिन वहां से भी कोई राहत नहीं मिली।

हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया था कि कलेक्टर का पत्र केवल नोटिस है, अंतिम आदेश नहीं। प्रबंधन को अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर दिया जाएगा।

इसके बाद प्रबंधन सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां याचिका खारिज करते हुए शीर्ष अदालत ने कहा कि कलेक्टर कानून के अनुसार निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह तय हो गया था कि अंतिम फैसला कलेक्टर ही लेंगे।

नक्शा पास कराने की कोशिश से खुला पूरा मामला

इंदौर कस्बे के खसरा नंबर 407/1669/3 की कुल 68.303 हेक्टेयर भूमि में से 1.702 हेक्टेयर पर क्रिश्चियन कॉलेज संचालित है। कॉलेज प्रबंधन ने परिसर की शेष जमीन पर व्यावसायिक कार्यालय, दुकानें और अन्य निर्माण के लिए नक्शा मंजूरी के लिए आवेदन किया था। इसकी जानकारी मिलते ही जिला प्रशासन ने पूरी जमीन की जांच शुरू की।

महिला अस्पताल और स्कूल के लिए दी गई थी जमीन

प्रशासनिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह जमीन वर्ष 1887 में होलकर रियासत के समय महारानी भागीरथी बाई द्वारा कैनेडियन मिशन को महिला अस्पताल और स्कूल चलाने के उद्देश्य से दी गई थी।

लीज की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख था कि जब तक जमीन का उपयोग अस्पताल और स्कूल के लिए होगा, तब तक ही यह चर्च के पास रहेगी। उपयोग बंद होने की स्थिति में जमीन शासन को वापस लेने का अधिकार रहेगा।

जमीन पर नहीं मिला महिला अस्पताल

जांच में सामने आया कि जमीन पर महिला अस्पताल का संचालन नहीं हो रहा है। कॉलेज भी केवल सीमित हिस्से में संचालित है। इसके बावजूद शेष भूमि पर व्यावसायिक गतिविधियों की योजना बनाई जा रही थी, जो मूल उद्देश्य और लीज शर्तों के खिलाफ है। इसके बाद कलेक्टर ने न केवल प्रस्तावित नक्शे पर रोक लगाई, बल्कि जमीन वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करते हुए प्रबंधन को कारण बताओ नोटिस जारी किया।

छुट्‌टी के कारण स्टे लेने का विकल्प भी नहीं

सभी कानूनी विकल्प समाप्त होने के बाद 23 जनवरी को कलेक्टर कोर्ट से अंतिम आदेश पारित हुआ। अवकाश के चलते कॉलेज प्रबंधन के पास अब किसी प्रकार का स्टे लेने का विकल्प भी नहीं बचा है। कलेक्टर शिवम वर्मा ने जूनी इंदौर तहसीलदार को तीन दिन के भीतर जमीन का कब्जा लेकर शासन के नाम दर्ज करने के निर्देश दिए हैं।

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