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MP की भोजशाला में मिले 800 साल के सबूत, ASI सर्वे रिपोर्ट पर 2 हफ्ते में आपत्तियां दाखिल करें, हाईकोर्ट के निर्देश

MP Dhar Bhojshala News: कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

MP Dhar Bhojshala News: धार। मध्य प्रदेश के धार स्थित भोजशाला मामले में सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। कोर्ट ने सभी याचिकाकर्ताओं और प्रतिवादियों को भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की सर्वे रिपोर्ट पर दो सप्ताह के भीतर आपत्तियां और सुझाव प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

हाईकोर्ट के आदेश पर एएसआई ने 22 मार्च 2024 से लगभग 100 दिनों तक भोजशाला परिसर और उससे 50 मीटर की परिधि में जांच, सर्वे और सीमित उत्खनन किया। सर्वे टीम में पुरातत्वविद्, अभिलेखविद्, रसायनविद् सहित अन्य विशेषज्ञ शामिल थे।

शिलालेखों में धार्मिक और शैक्षिक उपयोग के संकेत

रिपोर्ट में 12वीं से 20वीं सदी तक के शिलालेखों के प्रमाण मिले हैं। संस्कृत-प्राकृत और नागरी लिपि के साथ अरबी-फारसी में भी लेख प्राप्त हुए हैं। कुछ शिलालेख धार्मिक गतिविधियों का संकेत देते हैं, जबकि कुछ से यहां शिक्षण केंद्र होने की संभावना व्यक्त की गई है।

पश्चिमी स्तंभशाला में मिले ‘नागबंध’ शिलालेख पढ़ाई-लिखाई और व्याकरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण माने गए हैं। रिपोर्ट में उल्लेख है कि इस स्थान की स्थापना परमार वंश के राजा भोजदेव द्वारा कराए जाने की मान्यता है।

पारिजातमंजरी नाटिका और प्राचीन काव्य का उल्लेख

शिलालेखों में ‘पारिजातमंजरी’ नाटिका का जिक्र है, जिसे धार के परमार वंश के राजा अर्जुनवर्मन के गुरु मदन द्वारा लिखित बताया गया है। प्रस्तावना में देवी सरस्वती के मंदिर में इसके प्रथम मंचन का उल्लेख मिलता है।

एक अन्य शिलालेख में ‘अवनिकर्मसातम’ नामक काव्य का उल्लेख है, जिसे महाराजाधिराज भोजदेव की रचना माना जाता है। जांच के दौरान 13वीं सदी के करीब 50 शिलालेखों के टुकड़े, एक प्रतिमा का टूटा आधार और मंदिर अवशेष भी मिले हैं। कई पत्थरों पर लिखावट मिटाकर दोबारा उपयोग किए जाने के संकेत मिले हैं।

अरबी-फारसी के 56 शिलालेख

परिसर में अरबी-फारसी भाषा के 56 शिलालेख मिले, जिनमें से 43 स्याही से लिखे हैं। इनमें धार्मिक वाक्य, दुआएं और आगंतुकों के नाम दर्ज हैं। खुदाई के दौरान भगवान विष्णु की एक क्षतिग्रस्त प्रतिमा भी मिली है।

एक शिलालेख में मालवा के सुल्तान महमूद शाह प्रथम का उल्लेख है, जिसमें दरगाह परिसर में निर्माण कार्य की जानकारी दी गई है। इसके अलावा तुगलक काल में मस्जिदों के पुनर्निर्माण का भी जिक्र मिलता है।

एएसआई की रिपोर्ट में कहा गया है कि भोजशाला स्थल विभिन्न कालखंडों में धार्मिक, शैक्षिक और सामाजिक गतिविधियों का केंद्र रहा है। अब सभी पक्षों के जवाबों के आधार पर हाईकोर्ट आगे की कार्रवाई तय करेगा।

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