Saturday, September 21, 2019
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Chandrayaan 2 मिशन का मुरीद हुआ विदेशी मीडिया, इसरो की तारीफों के बांधे पुल

भारत का महत्वाकांक्षी चंद्रयान-2 मिशन भले ही अपनी मंजिल से दूर रह गया हो, लेकिन इसकी तकनीकी दक्षता और स्पेस सुपरपावर बनने की चाह की विदेशी मीडिया ने जमकर तारीफ की है. न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉशिंगटन पोस्ट, बीबीसी और गार्डियन जैसे बड़े मीडिया संस्थानों ने चंद्रयान-2 पर कई अहम रिपोर्ट प्रकाशित किए हैं.

अमेरिकी पत्रिका वायर्ड ने चंद्रयान-2 प्रोग्राम को भारत का ‘सबसे महत्वाकांक्षी’ स्पेस मिशन बताया है. वायर्ड ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है, ‘विक्रम लैंडर और उसके प्रज्ञान रोवर का चांद की सतह पर न उतर पाना भारतीय स्पेस एजेंसी के लिए बड़ा झटका जरूर है, लेकिन ये नहीं कह सकते कि मून मिशन पूरी तरह खत्म हो गया.’

तकनीकी कौशल की मिसाल

न्यूयॉर्क टाइम्स ने भारत के तकनीकी कौशल और दशकों के अंतरिक्ष विकास की जमकर तारीफ की है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने लिखा, ‘चंद्रयान पहली कोशिश में चांद पर भले न उतर पाया हो, लेकिन इससे तकनीकी कौशल और दशकों के अंतरिक्ष विकास का पता जरूर चलता है.’ रिपोर्ट में आगे लिखा गया है, ‘चंद्रयान-2 मिशन के आंशिक तौर पर असफल होने से भारत उस एलिट क्लब में शामिल होने से चूक गया जो पहले प्रयास में चांद की सतह पर उतर चुके हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स ने हालांकि इसका जिक्र भी किया कि चंद्रयान का ऑर्बिटर अब भी ऑपरेशन में है और चांद का चक्कर लगा रहा है.’

ब्रिटिश अखबार द गार्डियन ने चंद्रयान मिशन पर प्रमुखता से एक आर्टिकल प्रकाशित किया है जिसका शीर्षक है, ‘इंडियाज मून लैंडिंग सफर्स लास्ट मिनट कम्युनिकेशंस लॉस’. अखबार ने अपने आर्टिकल में फ्रांसीसी स्पेस एजेंसी सीएनईएस के वैज्ञानिक मैथ्यू वीज के हवाले से लिखा है, ‘भारत आज वहां जा रहा है जहां भविष्य में 20, 50 या 100 साल बाद इंसानों के बसेरे बनेंगे.’

भारत के लिए गर्व का पल

वॉशिंगटन पोस्ट ने अपनी हेडलाइन ‘इंडियाज फर्स्ट एटेंप्ट टू लैंड ऑन द मून एपियर्स टू हैव फेल्ड’ में लिखा है कि ‘मून मिशन भारत के लिए सबसे बड़ा गर्व साबित हुआ है.’ आर्टिकल में लिखा गया है, ‘असफलता के बावजूद स्पेस एजेंसी और उसके वैज्ञानिकों के समर्थन में सोशल मीडिया पर वाहवाही का सैलाब देखा गया…यह घटना स्पेस मिशन के तौर पर भले झटका हो लेकिन इसमें भारत की युवा आबादी की महत्वाकांक्षा गहराई से देखी जा सकती है.’

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