Monday, July 22, 2019
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राहुल गांधी को सुषमा स्वराज की नसीहत- आडवाणी हमारे पिता समान, रखें भाषा की मर्यादा

नई दिल्ली: कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने कहा है कि उन्हें अपनी भाषा की मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए. सुषमा स्वराज ने ये टिप्पणी राहुल गांधी के उस बयान पर की है जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने गुरु लाल कृष्ण आडवाणी को जूता मारकर स्टेज से नीचे उतार दिया.

सुषमा स्वराज राहुल गांधी के इस बयान से काफी आहत दिखी. उन्होंने शनिवार को हिन्दी और अंग्रेजी में ट्वीट करते हुए कहा कि राहुल के बयान से वह आहत हुई हैं और उन्हें अपनी भाषा की मर्यादा का ख्याल रखना चाहिए. राहुल गांधी के बयान के बाद बीजेपी के किसी बड़े नेता की ये पहली आधिकारिक प्रतिक्रिया है.

सुषमा स्वराज ने ट्वीट किया, “राहुल जी- आडवाणी जी हमारे पिता तुल्य हैं. आपके बयान ने हमें बहुत आहत किया है. कृपया भाषा की मर्यादा रखने की कोशिश करें.” बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शुक्रवार को पीएम नरेंद्र मोदी पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा था कि नरेंद्र मोदी जहां भी जाते हैं वहां किसी ना किसी की बुराई करते हैं. राहुल ने कहा कि मोदी जी के गुरु कौन हैं? आडवाणी जी. शिष्य गुरु के सामने हाथ भी नहीं जोड़ता. स्टेज से उठा कर फेंक दिया आडवाणी जी को. जूता मार के आडवाणी जी को उतारा स्टेज से और हिन्दू धर्म की बात करते हैं. कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि हिन्दू धर्म में कहां लिखा है कि लोगों को मारना चाहिए.

बता दें कि लाल कृष्ण आडवाणी को इस बार बीजेपी नेतृत्व ने टिकट नहीं दिया है. कई साल से गुजरात के गांधीनगर सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने वाले एलके आडवाणी इस बार के लोकसभा चुनाव में चुपचाप हैं. लंबे दिनों के बाद चुप्पी तोड़ते हुए गुरुवार को बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग में पीएम नरेंद्र मोदी पर अप्रत्यक्ष रूप से निशाना साधा था.

पार्टी की स्थापना दिवस से दो पहले आडवाणी ने अपने ब्लॉग में लिखा था कि देश के लोकतंत्र का सार अभिव्यक्ति का सम्मान और इसकी विभिन्नता है. अपनी स्थापना के बाद से ही बीजेपी ने उन्हें कभी भी ‘शत्रु’ नहीं माना जो राजनीतिक रूप से हमारे विचारों से असहमत हो, बल्कि हमने उन्हें अपना विरोधी माना है. इसी तरह, भारतीय राष्ट्रवाद की हमारी अवधारणा में, हमने कभी भी उन्हें, ‘राष्ट्र विरोधी’ नहीं कहा, जो राजनीतिक रूप से हमसे असहमत थे.

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