Thursday, April 25, 2019
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सांप्र​​दायिक नहीं है भारत ​- ​सुधा राजे

ऐसे लेखक और कवि समय के अपराधी ही बनने जा रहे हैं जो जो एक क्षणिक राजनीतिक अभियान में विरोध के लिये विरोध को चल रही लंबी दशकों पुरानी साजिश का हिस्सा बस केवल स्पर आॅफ मोमेन्ट के कारण बनते जा रहे हैं । एक एजेण्डा सैटिंग थ्योरी जो सदियों से चल रही है भारत में और भारतीयों की छवि सदा ही कलंकित करके विदेशों से कभी जेहाद कभी कम्युनिज्म कभी नक्सलिज्म कभी मिशनरी ईसाईकरण के नाम पर जमकर धन प्राप्त करती रही है वही विचारधारा सुबूत जुटाती रहती है और एक एक करके अनेक नाम जुड़ते हैं क्योंकि वे लोग सदियों से यही कार्य संगठित कर रहे हैं ,जबकि ये कठपुतली कलमबाज नहीं जानते कि वे खुद ब्रूटस की तरह प्रयोग किये जा रहे हैं ,,,,,,,,जो कभी दो सतर नहीं लिख सके देश पर स्त्रीदशा पर बालबदहाली पर स्वतंत्रता संग्राम पर और कृषक मजदूर पर ,,,,वे कलम भांजने चल पड़े हैं आज इसी बहाव में निशाना बनकर कि
“”अमुक अमुक अमुक केवल इसलिये मार डाला गया क्योंकि वह मुसलमान था ,,,
वह मुसलमान था ,,,,,
और बुरी तरह से हिन्दू सहिष्णुता को आहत करने लगते हैं ।
नासमझी में लोग जो कि सचमुच केवल हिंदू ही हैं दयालु सहिष्णु और मित्रादी वे जबरन सोचने लगते हैं कि अपराधी है । कौन होते हो तुम सबके सब हिंदू समाज को जबरन अपराध बोध कराने वाले?जबकि ऐसे मुझ से लाखों करोड़ों हैं जिन्होने कभी नाहक मच्छर तक नहीं मारा चींटी तक को दाना देने वाले रहे !!
लोग भूल जाते हैं कि “झुंड बनाकर बाईक से घेरकर लड़कियां जमकर नोंची छेड़ी और मसली कुचली जाती हैं अभी वीडियो देखा होगा न ?तब कविता की ?पूछा कि ये दलित की बेटी है इसलिये मुसलमान नोंच रहे हैं ?
सरला बट ?चौंक गये याद आयी कभी कविता में ?पद्मिनी पर लिखा ?दुर्गावती याद रही ?अवंतीबाई याद आई ?डाॅक्टर नारंग ?कश्मीरी पंडितों की बहू बेटियां बहिनें ?जिनकी चीखें सुनकर मजबूरन सबके सब त्याग करखानाबदोश हो गये महलों से तंबुओं में आ गय?मुजफ्फरनगर की लड़कियों ने पढ़ना त्याग दिया याद रहा क्या कीमत चुकायी?इसी ट्रेन में कुछ एक ही दशक पहले अटल बिहारी जी का रिश्तेदार लड़का मार दिया गया था ऐसे ही ,तब याद आयी कविता ?कहीं चला कोई मूवमेन्ट कि “”मैं इस में शामिल नहीं ”
कहीं मुसलिमों के खिलाफ मुसलिमों में चला कोईआंदोलन कि हम सब विरोध करते हैं भारतीय महाद्वीप हो रही गैर मुसलिमों की हत्या बलात्कार छेड़छाड़ का !!प.उ.प्र. बंगाल बिहार में लड़कियां डर डर कर रहतीं हैं और गाय पालक गौ हत्यारों की जीभ चटोरी से बिलखते भूखे शिशु लिये खामोश रह जाते हैं ,हमारे ही चार पांच ढोर चोरी होकर काट डाले गये आज तक पता नहीं कौन चोर रहा । बैल बिना किसान और गाय बिना ग्रामीण भूखों मरने लगा है परंतु गौमांस के समर्थनमें कौन कैम्पेन चला रहा है वे लोग जो जो कृषक से सहानुभूति जताते हैं जब जब वह आत्हत्या कर ले रहा है !!कभी सुना कैम्पेन कि आज अमुक नगर के मुसलमानों ने हिंदू गरीब कृषक परिवार को गाय बैल दान में दिये और बैठकें की कसाईयों ने कि अब से इस गांव नगर में गौ हत्या गौ मांस नहीं खाया जायेगा ??तब कविताई कहां चली गयी ???क्योंकि उसपर ये तेज असर लाईक नहीं आने थे न । कौन कौन मान रहा है कि हिंदू हत्यारे पापी मुसलिम वधिक होते जा रहे हैं ?कम से कम मैं तो नहीं । जो जो मांसाहारी हिंदू तक हैं वे एक जीव की झटके में मौत करते हैं ताकि दर्द न हो और यह भी कि उनमें खुद काटकर खाने की ताकत नहीं अकसर कोई मुसलमान या खटिक या कोॆई योद्धा परंपरा का व्यक्ति ही यह कार्य करके तैयार मांस दे दे तो भले खा पका ले । चूहेदानी से चूहा पकड़ने और जंगल में छोड़ने वाले हिंदू ही अधिक हैं । तब क्यों यह दुष्प्रचार मेरे महान राष्ट्र के खिलाफ ये देश द्रोही कर रहे हैं कि भारत में मुसलिम ईसाई और दलित सुरक्षित नहीं हैं ? तो क्या सीरिया बगदाद पाकिस्तान में अफगानिस्तान बांगलादेश में ईराक ईरान अरब इजरायल नें मुसलमान बहुत अधिक सुरक्षित हैं ? कहां किनको वहांअल्पसंख्यक आरक्षण मिला हुआ है ? कहां किनको वहां पर्सनल लाॅ का हक मिला हुआ है ?कहां वे शत्रुराष्ट्र का ध्वज फहराने का हक रखते हैं?कौन कौन देश फ्री में सब सुविधायें दे रहा है सबसिडी दे रहा है ?
भारत में यदि मुसलिमों को खतरा होता तो देश विभाजन के समय ही क्यों पाकिस्तान से अधिक बड़ी आबादी हिन्दुस्तान में ही हिन्दुओं के बीच टिकी रह गयी ?आंकड़े एकत्र करें कि पाकिस्तानअफगानिस्तान बांगलादेश में कितने मुसलिम मारे लूटे गये अब तक पचहत्तर सालों में बनिस्बत भारत के ?आप लोगों को कुछ पता भी है कि आज भी कुछ खास त्यौहारों पर मुसलिम ही वहां और यहां भारत तक में एक खास मुसलिम समुदाय के लोगों पर पत्थर बरसातेल हैं ??है कोई कविता अब तक इस कुप्रथा के विरोध में?शियाओं की लगातार हत्याओं का मुसलिमों से जवाब पूछ सकते हैं आप ?क्योंकि वे हारे हुये लोगों के वंशज हैं और इसलिये आज तक मुहर्रम मनाते हैं और सीनाजनी करके खुद का रक्त बहाते हैं !!!लेखक बनते हैं आप इस परंपरा पर कितना लिखा कि अब तो बंद करो मातम ?कभी हिम्मत की पूछने की कि भाई हिलाला क्यो ?क्यों चार शादी ?क्यों तीन शब्द का तलाक ? तब न कीपैड चला न ही तब स्याही बची न शब्द ??पता तो करते कि पूरे भारत मात्र में ही आज दिनांक तक जो जो हत्या बलात्कार और चोरी डकैती स्मगलिंग अपहरण बच्चाबाजी शिशु बेचना वेश्याबनाना और विदेशों को मानव विक्रय हुआवउसमें कितने हिंदू अपराधी है कितने मुसलिम अपराधी हैं ??नहीं तब आप कहेंगे कि अपराधी का मजहब या जाति नहीं होती वह केवल अपराधी होता है !!तब आप मानव बन जाते हैं जब मुसलिम ही मुसलिम को लूटता ठगता मार डालता है !!आपसे कहां लिखा जायेगा इस पर कि आज भी लड़कियां केवलइस लिये पढ़ना त्याग देती है गांव से नगर दूर है और रास्ते में उनको डराया जाता है !!आप कैसे समझेंगे कि अपराध बढ़ रहे हैं इसलिये क्योंकि जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है और जब जब बात दो बच्चों पर नसबंदी की आती है संजय गांधी से राहुल गांधी तक सबकी बोलती बंद करवा दी जाती है । कौन लिखेगा इस पर कि भूगोल नहीं बढ़ा सकता भारत तो चलो अब सब के सब केवल दो संतान पर बंद करेंपरिवार बढ़ाना ? जब लोग बुरका परदा और दहेज नें तीन तलाक मेंऔर हिलाला में दम घुटती औरतों को बच्चे दर बच्चे पैदा करने पर विवश करते रहते हैं तब आपकी भाषा कुन्द और शब्द कम पड़ जाते हैं !! है कोई कैम्पेन कहीं किसी मुसलिम का जनसंख्या नियंत्रण बुरका समापन परदा समापन और जबरन या ललचाकर किये जा रहे धर्मांतरण के बंद करने के लिये ?? आपने कभी सवाल उठाया कि आज जब सीमा पर संकट है तो सैनिक सीमा की रखवाली करने जाता तब कशमीर में मुसलमान पत्थर क्यों फेंकता है ?पढ़े खेले कमाये और चैन से रहे न !!क्यों वहां भारत का नागरिक ही पूर्वजों से हिंदू होकर भी आज विदेशी झंडा लेकर लड़कियों को पत्थर थमाकर स्कूल बंद करवा देता है ?यह सब मानवता है ?
नहीं …..
मैं यहां किसी की भी हत्या बलात्कार छेड़छाड़ को जायज नहीं ठहरा रही हूंमैं नाजायज ठहरा रही हूँ उस मूर्ख को जो देशद्रोहियों के सुर में सुर मिलाकर मेरे राष्ट्र को बहुसंख्यक उन्मादियों का राष्ट्र साबित करने पर तुला हुआ है जबकि वह भी खुद उसी गिनती में शामिल है ।
ये “””मैं शामिल नहीं “””आंदोलन है क्या मालूम है ?ईसा की बर्बर हत्या के समय प्रशासक ने महासभा में जब भीड़ के समक्ष षडयंत्रकारियों की मांग पर ईसा को मृत्युदंड दिया तब उसने अपने हाथ चिलमची में धोकर कहा मैं खुद इस हत्या मैं शामिल नहीं हूँ “”यह एक अघोषित आक्षेप है हर हिंदू पर कि यदि तुम अब इस घोषणा को टांगते नहीं तो तुम भी इन हत्याओं में शामिल हो जो जो मुसलमानों की हुयीं !!!!
तो क्या जिन जिन मुसलमानों ने यह घोषणा नहीं की कि अब तक एक हजार वर्षों में जितने मंदिर तोड़कर कब्रिस्तान मजार मकबरे कर दिये मूर्तियां तोड़कर सीढ़ियों मेंभर दीं और लड़कियां लूटकर वेश्यायें बना दी कत्ल पर कत्ल किये गये सिखों हिंदुओं बोद्धों जैनों ईसाईयों यहूदियों पारसियों के क्या वे सब शामिल है ??अगर आज का कोॆई भी भारतीय मुसलिम नागरिक जो देश कानून संविधान का पालन करता है अपराधी नहीं है बिना यह घोषणा किये कि वह हिंदू सिख जैन पारसी यहूदी ईसाईयों की हत्या लूट बलात्कार में शामिल नहीं “तो हम सब कैसे शामिल हैं ???????यह कितनी बड़ी साजिश है जिस दिन समझ आयेगी सिवा उफ के कुछ न बचेगा कहने को !
जनसंख्या के अनुपात में अपराध बढ़ रहे हैं जिसका पहला कारण ही अशिक्षा और कुशिक्षा है ,ये कुशिक्षा वही है जो ऐसे कलमचियों को भी मिल रही है कि सांप्रदायिक हो गया है भारत और फासिस्ट हो गये है हिंदू और अघोषित आपात काल चल रहा है । इनको यह पता तक नहीं कि एक विशेष किताब में कितना जहरीला व्यहार लिखा है ऐसों के लिये जो मुसलिम नहीं हैं और आज तक उन पंक्तियों सहित उस किताब को बदस्तूर हर बच्चे को पढ़ता बेहद अनिवार्य है चाहे वह स्कूल न जाये , कभी सवाल इसपर उठाईये कि मनुस्मृति की तरह इस किताब की उन सब पंक्तियों को भी अब वैश्विक मानवता समरसता के नाम पर निकाल देना चाहिये नवीन संस्करणों से जिन जिन में गैर मुसलिम पर दुर्व्यवहार नफरत और स्त्री पर हिंसा का समर्थन है !!नहीं कर सकते न कह सकते । विश्व एक गांव नहीं हो पा रहा आज सारी व्यवस्था आतंकी जेहाद से लड़ने में कम पड़ रही है हर जगह त्यौहार की खुशियां मातम में बदल जा रही हैं पेरिस लंदन रूस अमेरिका कनाडा भारत ….क्या कोई अभियान इस पर चला कि हर मुसलिम यह घोषणा करे कि मैं नहीं हूँ इस जेहाद का हिस्सा ?क्यों ऐसी मूर्खता ?
अपराध सिर्फ अपराध है और उस पर नियंत्र ही पहली आवश्यकता है और आवश्यकता है कठोर कर्त्तव्यनिष्ठ राष्ट्रीय नागरिकता की । मैंनऐसे किसी भी अभियान का समर्थन नहीं कर सकती जिससे मेरे राष्ट्र का अपमान होता हो छवि खराब हो मेरे देश की चुनी हुयी लोकतांत्रिक व्यवस्था की बदनामी हो और सरकार को कार्य चलाने में बाधा पहुँचे । आवश्यता है कि अपराध पर कठोरता से कारर्वाही हो और अपराधी को दंड मिले साथ ही दुष्रचारकों पर भी लगाम लगायी जाये विश्व में भारत को समर्थकों की जरूरत है और ऐसे लोग जो विश्व में भारत की छवि खराब कर रहे है वह देश की मानहानि के अपराधी हैं । कैसा परिणाम खतरनाक होगा यदि सन सैंतालीस से आज तक हर हत्याबलात्कार दंगे और छेड़छाड़ चोरी डकैती स्मगलिंग नकली नोट निर्माण और कालाबाजारी तक के सब के सब अपराधो का अपराधी और पीड़ित जातिवार मजहब वार घोषित करके सबका चिट्ठा खोल दिा जाये ??मैं हिंदू हूँ किंतु मैं सांप्रदायिक नहीं हूँ मैं किसी पर भी कैसी भी हिंसा का समर्थन नहीं करती सिवा तब के जबकि अपराधी को न्यायालय दंड दे या शत्रु पर सेना और अपराधी पर गृह पुलिस कार्यवाही करे । औऱ हां न मैं संघ से हूँ न विहिप से न भाजपा से न ही राजनीतिक दल या किसी एन जी ओ से ।
देश प्रथम।

जयहिंद जयभारत ।

(इस लेख का नकल या आंशिक तोड़ फोड़ काॅपी राईट एक्ट 1950~1957के तहत अपराध है ) ©®सुधा राजे

​Sudha Raje
सुधा राजे
एड.जर्न.
610/2
पीतांबरा आशीष
बङी हवेली
फतहनगर
शेरकोट
( बिजनौर )उ.प्र.
246747
​​

©®सुधा राजे एड​

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